
Lucknow, 2 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने Friday को उत्तर प्रदेश में 53.46 लाख रुपए की अचल संपत्ति जब्त की है. यह कार्रवाई आजमगढ़ के एक सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे के पूर्व शिक्षक के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में की गई है, जिन्होंने ‘ब्रिटिश नागरिकता’ लेने के बाद भी वेतन लेना जारी रखा था.
ईडी के Lucknow जोनल ऑफिस ने ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम’ (पीएमएलए), 2002 के तहत एक अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है. अधिकारी ने एक बयान में कहा कि यह जब्ती शम्सुल हुदा खान और अन्य लोगों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है.
बयान के अनुसार, जब्त की गई संपत्ति 189.75 वर्ग मीटर का रिहायशी जमीन का टुकड़ा है, जो शम्सुल हुदा खान के नाम पर रजिस्टर्ड है और उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में स्थित है.
ईडी की जांच उत्तर प्रदेश Police द्वारा आईपीसी, 1860 की धाराओं 419, 420, 467, 471 और 120-बी तथा बीएनएस, 2023 की धारा 318(4) के तहत दर्ज कई First Information Report के आधार पर शुरू की गई थी.
ईडी ने कहा कि आरोप है कि शम्सुल हुदा खान ने 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली थी, लेकिन इस बात को छिपाया और खुद को भारतीय नागरिक के तौर पर पेश करते रहे.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि आरोप है कि उन्होंने संत कबीर नगर जिले में अचल संपत्तियां खरीदने के लिए अपने सरेंडर किए गए भारतीय पासपोर्ट के साथ-साथ पैन, आधार और वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया.
एजेंसी ने कहा कि वह आजमगढ़ के मुबारकपुर में Government से सहायता प्राप्त मदरसे में शिक्षक के पद पर भी बने रहे और सरकारी खजाने से वेतन और रिटायरमेंट के लाभ लेते रहे.
जांच से पता चला कि शम्सुल हुदा खान ने 19 दिसंबर 2013 को ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली थी और इस तरह वह भारतीय नागरिक नहीं रहे.
हालांकि, ईडी ने कहा कि आरोप है कि उन्होंने इस बात को छिपाया और आजमगढ़ के मुबारकपुर में Government से सहायता प्राप्त मदरसे में असिस्टेंट टीचर के तौर पर काम करते रहे.
उत्तर प्रदेश Government के अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग की जांच में पाया गया कि 2007 से 2017 तक उनकी सेवा का कभी सत्यापन नहीं किया गया था. ईडी ने कहा कि इसके बावजूद, उन्हें 2017 में रेगुलर पेंशन के साथ स्वैच्छिक रिटायरमेंट (वीआरएस) दे दिया गया.
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डीके/एबीएम
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