उत्तराखंड: 10 वर्ष बाद मां बनने की खुशी, फिर जिंदगी-मौत की जंग में फंसी महिला, डॉक्टरों ने बचाई जान

देहरादून, 3 अक्टूबर . उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने एक महिला को उस वक्त नया जीवन दिया, जब उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी. नेपाल मूल की यह महिला केदारघाटी में अपने पति के साथ मजदूरी करती है. शादी के करीब दस वर्ष बाद गर्भ ठहरने से परिवार में खुशियां लौटी थीं, लेकिन जांच में सामने आया कि गर्भाशय की बजाय अंडाशय में गर्भ ठहर गया है.

28 सितंबर को अचानक अंडाशय फट गया और पेट में तेजी से रक्तस्राव होने लगा. गंभीर हालत में जिला अस्पताल पहुंची महिला का डॉ. संजीव कटारा और उनकी टीम ने तत्काल ऑपरेशन किया और उसकी जान बचा ली.

करीब दस वर्ष से संतान की उम्मीद लगाए इस परिवार के लिए करीब ढाई महीने पहले खुशखबरी आई थी. महिला गर्भवती थी और परिवार वर्षों के इंतजार के बाद खुश था, लेकिन जांच में सामने आया कि गर्भाशय की बजाय अंडाशय में गर्भ ठहरा है. चिकित्सकों के मुताबिक यह एक असामान्य और गंभीर स्थिति थी.

अंडाशय में भ्रूण के विकास के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण महिला को लगातार दर्द हो रहा था. 28 सितंबर को दर्द अचानक असहनीय हो गया. पति उसे नारायणकोटी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए महिला को जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया.

जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉ. संजीव कटारा ने महिला की जांच और अल्ट्रासाउंड किया. जांच में पता चला कि अंडाशय फट चुका है और पेट के भीतर बड़ी मात्रा में रक्त जमा हो गया है. स्थिति बेहद गंभीर थी और समय गंवाना महिला की जान पर भारी पड़ सकता था. ऐसे में महिला को दूसरे अस्पताल रेफर करने के बजाय डॉक्टर ने तत्काल ऑपरेशन का फैसला लिया.

डॉ. संजीव कटारा (स्त्री रोग विशेषज्ञ) और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए सर्जरी शुरू की. सीमित संसाधनों के बीच किए गए इस ऑपरेशन में चिकित्सकीय टीम को सफलता मिली और महिला की जान बचा ली गई. फिलहाल महिला खतरे से बाहर है.

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डीके/डीकेपी