
चंपावत, 4 अक्टूबर . Sunday को चंपावत के बनबसा में हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. बैठक में 24 प्रस्तावों पर चर्चा और मंजूरी दी गई.
अधिकारियों के अनुसार, इन उपायों में रोजगार, शिक्षा, कर्मचारी जवाबदेही, भू-राजस्व और निजी विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करने वाले नियम शामिल थे.
Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में रोजगार के अवसरों को मजबूत करने, प्रशासनिक जवाबदेही में सुधार करने और राज्य के विभिन्न हिस्सों में विकास को गति देने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई.
मीटिंग में लिए गए निर्णयों के तहत उत्तराखंड Government ने तराई विकास निगम लिमिटेड (टीडीसी) के लिए 66 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को मंजूरी दी.
राज्य कैबिनेट ने कर्मचारी आचरण नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी, जिसके तहत ग्रुप ए और ग्रुप सी कर्मचारियों के लिए हर साल अपनी संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा.
ग्रुप बी कर्मचारियों के लिए संशोधित प्रावधानों के तहत हर पांच साल में एक बार संपत्ति का विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा.
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी के अधिकारियों को ग्रुप बी पदों पर नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. इस निर्णय से योग्य अधिकारियों को निर्धारित पदों पर नियुक्ति का एक व्यवस्थित अवसर मिलने की उम्मीद है.
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मुर्गी पालन को बढ़ावा देने से संबंधित एक अन्य निर्णय लिया गया.
उत्तराखंड Government ने पहाड़ी क्षेत्रों में मुर्गी पालन से जुड़े लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया है.
इस मुर्गी पालन सब्सिडी योजना से लगभग 2,000 लाभार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है और इसका उद्देश्य राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है.
रोजगार के मोर्चे पर, उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 200 करोड़ रुपए की कौशल विकास योजना को मंजूरी दी.
इस पहल के तहत, उच्च शिक्षा विभाग युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के अवसरों से जोड़ने और रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों तक उनकी पहुंच में सुधार करने की दिशा में काम करेगा.
राज्य मंत्रिमंडल ने छात्रों के लिए कौशल डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी दी. इन पाठ्यक्रमों से एक लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इन्हें उनकी नियमित शिक्षा के साथ-साथ कौशल हासिल करने के अवसर मिलेंगे.
चिकित्सा क्षेत्र से संबंधित एक अन्य निर्णय में राज्य मंत्रिमंडल ने डॉक्टरों को दिए जाने वाले वजीफे में वृद्धि को मंजूरी दी.
उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी गई.
संशोधित ढांचे के तहत, विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पहले आवश्यक 10 एकड़ भूमि की आवश्यकता को बदल दिया गया है.
नए प्रावधान के तहत 20,000 वर्ग मीटर भूमि के आधार पर विश्वविद्यालय स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इसके साथ ही, 5 करोड़ रुपए की गारंटी निधि बनाए रखने की पूर्व अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है.
राज्य मंत्रिमंडल ने नजूल भूमि के नियमितीकरण से संबंधित निर्णय भी लिए. राज्य के अन्य क्षेत्रों के अलावा खटीमा, बनबसा और चंपावत में भी ऐसी भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
वन भूमि से संबंधित मामलों के लिए उत्तराखंड Government ने परियोजना प्रबंधन इकाइयां (पीएमयू) स्थापित करने और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया है. इस कदम का उद्देश्य वन भूमि से संबंधित मामलों के संचालन को सुव्यवस्थित करना और प्रक्रिया में समन्वय को बेहतर बनाना है.
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन विभागों के लिए महानिदेशक पद के सृजन को भी मंजूरी दी.
एक अन्य प्रशासनिक निर्णय में नरेंद्रनगर में एक उप-पंजीयक कार्यालय खोलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई.
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एमएस/
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