
सूरत, 9 सितंबर . उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच हनुमान मंदिर को हटाए जाने के विवाद पर सूरत के अटल आश्रम के महामंडलेश्वर बटुकगिरी महाराज ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हनुमान जी चारों युगों में विराजमान हैं और देश के लगभग हर गांव में उनका मंदिर देखने को मिलता है. ऐसे में करीब 170 साल पुराने मंदिर को हटाने के बजाय प्रशासन को वैकल्पिक रास्ता तलाशना चाहिए.
समाचार एजेंसी से खास बातचीत में बटुकगिरी महाराज ने कहा कि यदि सिंहस्थ महाकुंभ के लिए प्रशासन को जमीन या रास्ते की आवश्यकता है तो मंदिर को हटाना ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए. हनुमान मंदिर के महत्व को देखते हुए वहां बेहतर मंदिर का निर्माण कराया जा सकता है और सड़क को थोड़ा दूसरी दिशा से निकाला जा सकता है. सिंहस्थ महाकुंभ सनातन धर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है. ऐसे में जहां मंदिर मौजूद हैं, वहां मंदिरों की रक्षा और पूजा-अर्चना की व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने प्रशासन और Government से इस दिशा में विचार करने की अपील की.
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और नवरात्रि के दौरान पूजा पंडालों के आसपास मांस-मछली पकाने और बेचने को लेकर धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भी बटुकगिरी महाराज ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने सनातन धर्म और हनुमान जी के बारे में देश-दुनिया में जागरूकता बढ़ाई है.
बटुकगिरी महाराज ने कहा कि बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में मछली का अलग स्थान रहा है. उन्होंने रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण देते हुए बंगाल की परंपराओं का उल्लेख किया. उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्यों में धार्मिक मान्यताएं और खान-पान की परंपराएं अलग हो सकती हैं. Gujarat, Maharashtra समेत कई राज्यों में धार्मिक आयोजनों और पूजा-अर्चना के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है. नवरात्रि या देवी पूजा जैसे धार्मिक पर्वों के दौरान शराब और मांसाहारी भोजन से बचना चाहिए. धार्मिक पर्वों के दौरान श्रद्धा और संयम का पालन किया जाना चाहिए. पूजा के समय हिंसा से जुड़े कार्यों से दूरी बनाना धार्मिक भावना के अनुरूप है.
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