ईयू-भारत एफटीए से बदलेगा भारत-जर्मनी व्यापार, टैरिफ घटेंगे, रोजगार बढ़ेंगे: डॉ. जैस्पर वीक

नई द‍िल्‍ली, 3 नवंबर . India में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक ने भारत-जर्मनी संबंधों को बेहद व्यापक और गहरा बताया. के साथ व‍िशेष बातचीत में राजदूत डॉ. जैस्पर वीक ने कहा क‍ि हमने हाल ही में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया है. साथ ही, हमारी रणनीतिक साझेदारी को भी 26 साल हो चुके हैं. मेरा मानना है कि अब हम इस रणनीतिक साझेदारी से जुड़ी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं और उससे भी आगे बढ़ रहे हैं.

उन्‍होंने कहा क‍ि India और जर्मनी के बीच संबंध बहुत गहरे और विविध हैं. आज के लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र को हमारी साझेदारी शामिल करती है, जैसे व्यापार और निवेश, अनुसंधान और तकनीक, रक्षा और सुरक्षा, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) और ऊर्जा सुरक्षा, कुल मिलाकर यह एक बेहद व्यापक रिश्ता है. मुझे लगता है कि आने वाले दिनों, हफ्तों, महीनों और वर्षों में हमारा सहयोग और भी मजबूत और गहरा होगा.

राजदूता जैस्पर ने कहा क‍ि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिस पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने और अगले साल की पहली छमाही में लागू होने की उम्मीद है. India और जर्मनी के व्यापार और निवेश संबंधों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा. इससे कई औद्योगिक उत्पादों और कुछ कृषि उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) कम हो जाएंगे.

डॉ. जैस्पर ने कहा क‍ि मेरा मानना है कि हमारे बीच आपूर्ति शृंखलाओं (सप्लाई चेन) को और बेहतर तरीके से जोड़ने की बड़ी संभावना है. इससे दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर अपने उत्पादों का निर्माण अधिक प्रतिस्पर्धी तरीके से कर सकेंगे. इतना ही नहीं, दूसरे देशों को होने वाले निर्यात में भी इसका फायदा मिलेगा.

इसका लाभ India की अर्थव्यवस्था को मिलेगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका फायदा India के लोगों को होगा. मजबूत अर्थव्यवस्था से Government के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी. इसलिए यह समझौता India और भारतीयों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकता है. जहां तक ऊर्जा क्षेत्र का सवाल है, जर्मनी पहले से ही India का सहयोग कर रहा है. आज हम ‘भारत-जर्मनी ऊर्जा फोरम’ के 20 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मना रहे हैं. यह मंच खास तौर पर India को जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने में मदद करने के लिए बनाया गया था.

उन्‍होंने कहा क‍ि जर्मनी ने तकनीक, विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता के माध्यम से सौर ऊर्जा संयंत्रों, बिजली उत्पादन परियोजनाओं और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों में India का सहयोग किया है. इस दौरान India ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है.

डॉ. जैस्पर ने कहा क‍ि वर्ष 2006 में India की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग 2 से 3 गीगावाट थी, जो आज बढ़कर करीब 300 गीगावाट तक पहुंच गई है. यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और India को इस पर गर्व होना चाहिए.

उन्‍होंने कहा क‍ि भविष्य में यह ऊर्जा साझेदारी केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि India में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी औद्योगिक क्षमताओं को विकसित करने पर भी ध्यान देगी. इससे India सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बिजली ग्रिड से जुड़ी जरूरतों के लिए आवश्यक उपकरणों और तकनीकों के उत्पादन में और अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा.

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एवाई/