ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एफआईआईटीजेईई और निदेशकों के खिलाफ चार्जशीट दायर की

Lucknow, 16 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) के Lucknow जोनल कार्यालय ने छात्रों से वसूली गई फीस के कथित गबन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में एफआईआईटीजेईई लिमिटेड और उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल एवं मोनिला गोयल के खिलाफ गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. यह जानकारी Friday को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई.

ईडी ने Thursday को चार्जशीट दाखिल की थी. एजेंसी ने आरोपियों को दोषी ठहराने और जांच के दौरान जब्त एवं अस्थायी रूप से कुर्क की गई 71.88 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है.

ईडी ने उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा एवं Madhya Pradesh के Bhopal में Police द्वारा दर्ज चार First Information Report के आधार पर जांच शुरू की थी. ये First Information Report भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के उन प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थीं, जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 406, 420, 120बी और 34 के अनुरूप हैं.

First Information Report के अनुसार, एफआईआईटीजेईई ने जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी सहित दो से चार साल के कोचिंग कार्यक्रमों के लिए प्रत्येक छात्र से अग्रिम रूप से 2.8 लाख रुपए से 3.5 लाख रुपए तक की फीस कथित तौर पर वसूली थी. संस्थान ने छात्रों को आश्वासन दिया था कि पाठ्यक्रम पूरे कराए जाएंगे.

हालांकि, ईडी ने आरोप लगाया कि वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण शिक्षकों ने संस्थान छोड़ दिया और इसके बाद कई कोचिंग केंद्र बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक बंद हो गए.

एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि प्रबंधन ने छात्रों की फीस को दूसरी जगह इस्तेमाल किया और शिक्षकों के संस्थान छोड़ने के बावजूद नए छात्रों का दाखिला जारी रखा.

इस मामले में नोएडा Police भी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिसमें दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाया गया है. Police का आरोपपत्र लगभग 300 पीड़ितों, कोचिंग सेंटर संचालकों और अन्य गवाहों के बयानों के अलावा जांच के दौरान जुटाई गई फीस की रसीदों और अन्य साक्ष्यों पर आधारित है.

ईडी की जांच में दावा किया गया कि एफआईआईटीजेईई ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 केंद्र बंद कर दिए. इससे संस्थान में नामांकित 14,411 छात्र प्रभावित हुए, जो कोचिंग की फीस पहले ही जमा कर चुके थे.

एजेंसी के अनुसार, कंपनी नए छात्रों को दाखिला देती रही. इनमें मार्च 2029 तक चलने वाले कार्यक्रमों के छात्र भी शामिल थे, जबकि कंपनी को कथित तौर पर इस बात की जानकारी थी कि वह इन पाठ्यक्रमों को पूरा कराने में सक्षम नहीं होगी.

ईडी ने कहा कि कथित तौर पर अपने पास रखी गई और गबन की गई 85.79 करोड़ रुपए की फीस की पहचान अपराध से अर्जित आय के रूप में की गई है.

जांच में यह भी सामने आया कि दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को वित्त वर्ष 2022-23 से आगे की अवधि में वेतन के रूप में 24.92 करोड़ रुपए मिले.

जांच एजेंसी के अनुसार, दिनेश कुमार गोयल को हर महीने लगभग 56 लाख रुपए, जबकि मोनिला गोयल को हर महीने 25 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया.

ईडी के मुताबिक, निदेशकों को भुगतान जारी रहा, जबकि अन्य कर्मचारियों के वेतन में देरी हो रही थी या उनका भुगतान नहीं किया जा रहा था और कोचिंग केंद्र बंद हो रहे थे.

ईडी ने इससे पहले 24 अप्रैल 2025 को सात ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान 10 लाख रुपए नकद और 4.86 करोड़ रुपए मूल्य के आभूषण जब्त किए गए थे.

इसके अलावा, एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत 9 अक्टूबर 2026 को 66.92 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था.

ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है.

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एबीएस