
New Delhi, 24 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने Friday को बनीत सिंह तलवार को ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी नशीले पदार्थों की बड़े पैमाने पर तस्करी से जुड़ी है, जिसमें नशीले पदार्थों को टैल्क के अंदर छिपाकर रखा गया था. इसके साथ ही दिल्ली, पंजाब और Haryana में नशीले पदार्थों की बरामदगी भी हुई है.
आरोपी बनीत सिंह तलवार को Friday को को New Delhi के तीस हजारी कोर्ट (पश्चिम जिला) में विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने आरोपी को 5 दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया. ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज की गई First Information Report के आधार पर की. यह First Information Report हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य लोगों के खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए दर्ज की गई थी. इससे पहले, एनआईए ने इस मामले में छह आरोप-पत्र दाखिल किए थे. इनमें कई आरोपियों पर अफगानिस्तान, Pakistan और Dubai से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट के साथ साजिश रचने का आरोप है.
इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड ‘वितेश कोसर’ उर्फ ’राजू Dubai ’ है, जो एक वांछित आरोपी है. इसमें Pakistanी आईएसआई एजेंट और अफगान नागरिक भी शामिल हैं. जांच से यह भी पता चला है कि नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से प्राप्त 76 करोड़ रुपये की रकम को हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजा गया और इसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फंड देने के लिए किया गया.
ईडी की अब तक की वित्तीय जांच में कुल 89 करोड़ रुपये की ‘अपराध से प्राप्त आय’ का पता चला है. यह रकम नशीले पदार्थों की तस्करी, हवाला के जरिए अफगानिस्तान भेजी गई बिक्री की राशि और अन्य वस्तुओं के रूप में प्राप्त हुई थी. इस प्रक्रिया में अपराध से प्राप्त और कितनी आय हुई है, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है.
बनीत सिंह तलवार, हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है. हरप्रीत सिंह तलवार ने मास्टरमाइंड राजू Dubai के साथ मिलकर India में नशीले पदार्थों की तस्करी करवाई थी. जांच से पता चला है कि हरप्रीत सिंह तलवार की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत सिंह तलवार उन व्यावसायिक इकाइयों को संभालता और चलाता रहा, जो हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थीं. बनीत सिंह ने ‘मैजेंट इंडिया’ नाम की एक कंपनी को 55 लाख रुपये से अधिक की रकम दी. यह कंपनी हरप्रीत सिंह तलवार के नियंत्रण में थी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थी. वित्तीय विश्लेषण से पता चला है कि इसमें कई बार ‘राउंड-ट्रिपिंग’ (पैसों को घुमा-फिरा कर वापस लाना) की गई. हरप्रीत सिंह तलवार ने अपराध से कमाई गई रकम को अलग-अलग व्यावसायिक इकाइयों में डाला, जो बाद में कई चरणों के लेन-देन के जरिए बनीत सिंह तलवार तक पहुंच गई. इन लेन-देनों में अलग-अलग कंपनियों के बीच एक जैसी या मिलती-जुलती प्रविष्टियां पाई गईं, जो यह दिखाती हैं कि पैसों का लेन-देन एक सोची-समझी योजना के तहत किया गया था.
बनीत सिंह ने ‘बेनामी’ कंपनियों के नाम पर गाड़ियां खरीदने के लिए नकद जमा का इस्तेमाल किया, इन गाड़ियों को ईडी पहले ही जब्त कर चुकी है. इसके अलावा, बनीत सिंह तलवार ने हरप्रीत सिंह तलवार से मिली रकम का इस्तेमाल अचल संपत्तियां (जैसे जमीन या मकान) खरीदने के लिए किया. इन संपत्तियों का फायदा आज भी हरप्रीत सिंह तलवार और उसका परिवार उठा रहा है. ईडी की यह गिरफ्तारी, ड्रग तस्करी के रैकेट और इसमें शामिल ड्रग तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेन-देन के नेटवर्क को तोड़ने के लिए Government की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. ईडी राष्ट्रीय सुरक्षा और India की आर्थिक व्यवस्था की अखंडता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. मामले की आगे की जांच जारी है.
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ओपी/पीएम
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