ईडी की कार्रवाई, अवैध लौह अयस्क खनन मामले में 2.10 करोड़ की संपत्ति अटैच

Bengaluru, 3 सितंबर . Enforcement Directorate (ईडी) के Bengaluru जोनल ऑफिस ने अवैध लौह अयस्क खनन और निर्यात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने मेसर्स अक्षता मिनरल्स और अन्य के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 2 सितंबर को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी करते हुए लगभग 2.10 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति (रेजिडेंशियल प्लॉट) को अटैच किया है.

ईडी ने यह जांच अक्टूबर 2013 में सीबीआई द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की थी. यह First Information Report Supreme Court के निर्देशों के बाद बेलेकेरी पोर्ट से आयरन ओर के अवैध खनन और निर्यात के मामले में दर्ज की गई थी. बेलेकेरी पोर्ट कर्नाटक में अवैध खनन घोटाले के केंद्र के रूप में सामने आया था.

जांच में पता चला कि मेसर्स एसवीके मिनरल्स नामक एक पार्टनरशिप फर्म आयरन ओर के व्यापार में शामिल थी. 1 जनवरी 2009 से 31 मई 2010 की अवधि के दौरान फर्म ने अवैध रूप से हासिल किया गया आयरन ओर विभिन्न संस्थाओं को सप्लाई किया. जांच से यह साबित हुआ कि मेसर्स India ओर्स एंड मिनरल्स के माध्यम से और अंततः मेसर्स एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को सप्लाई किए गए 48,471 मीट्रिक टन आयरन ओर के लिए कोई वैध डीएमजी/बल्क/ट्रांजिट परमिट नहीं था.

इसी तरह यह भी साबित हुआ है कि मेसर्स एसवीके मिनरल्स ने मेसर्स अरशद एक्सपोर्ट्स को कुल 56,081.43 मीट्रिक टन अवैध रूप से निकाला गया आयरन ओर सप्लाई किया था, जिसे बाद में अरशद एक्सपोर्ट्स ने चीन को निर्यात कर दिया था.

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि अवैध आयरन और व्यापार गतिविधियों से कमाए गए मुनाफे का कुछ हिस्सा एसवीके मिनरल्स के पार्टनर्स द्वारा अचल संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया था. इसी अवैध कमाई को अपराध की आय मानते हुए ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5 (1) के तहत श्यामराज सिंह और बी.एस. नंदकुमार सिंह के नाम पर मौजूद चार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच किया है.

Enforcement Directorate ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और अवैध खनन से अर्जित अन्य संपत्तियों की भी पहचान की जा रही है.

एससीएच/डीकेपी