ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर का मामलाः हाई कोर्ट ने समय मांगने पर राज्य सरकार पर लगाया आठ हजार का जुर्माना

रांची, 2 नवंबर . Jharkhand हाई कोर्ट ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर Monday को सुनवाई के दौरान राज्य Government पर आठ हजार रुपए का जुर्माना लगाया. Government की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर अदालत ने यह आदेश दिया. जुर्माने की राशि Jharkhand विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के अकाउंट में जमा करनी होगी.

इससे पहले पिछली सुनवाई में प्रतिवादी संख्या दो पूर्व Chief Minister हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था. अदालत ने समय देते हुए उन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था. इस तरह मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगने पर राज्य Government और हेमंत सोरेन, दोनों पर जुर्माना लगाया जा चुका है.

ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य की ओर से यह याचिका दाखिल की गई है. इसमें हेमंत सोरेन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है. ईडी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. मामला 31 जनवरी 2024 का है. उस दिन हेमंत सोरेन ने रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल और अन्य अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें 29 से 31 जनवरी 2024 तक रांची में रहने को कहा था. इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली स्थित आवास पर बिना पूर्व सूचना के तलाशी ली गई. सोरेन ने आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई से उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मीडिया के जरिए उनके खिलाफ भ्रम फैलाकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई. इसके बाद ईडी अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी को निरस्त करने और उसके आधार पर Police की ओर से की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी. अदालत ने पहले अधिकारियों के खिलाफ जारी Police नोटिस और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राज्य Government से जवाब मांगा था.

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एसएनसी/डीकेपी