
New Delhi, 27 अक्टूबर . जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों को लेकर बयान देते हुए कहा है कि आज जिन मस्जिदों को तोड़ा जा रहा है, वे एक दिन फिर आबाद होंगी और वहां दोबारा ‘अल्लाहु अकबर’ की सदाएं बुलंद होंगी. उन्होंने कहा कि जो आज सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे, क्योंकि Governmentें आती-जाती रहती हैं.
अरशद मदनी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा कि इस्लाम को दुनिया की कोई ताकत न तो मिटा सकी है और न ही भविष्य में मिटा सकेगी.
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की Governmentें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, लेकिन मौजूदा Government मुसलमानों के साथ-साथ इस्लाम, उनकी धार्मिक पहचान और धार्मिक संस्थानों को भी निशाना बना रही है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने सांप्रदायिक ताकतों को सोवियत संघ के अंजाम से सबक लेने की नसीहत देते हुए कहा कि इस्लाम को मिटाने का सपना देखने वाले खुद इतिहास का हिस्सा बन गए, लेकिन इस्लाम आज भी जिंदा है.
मदरसों की भूमिका पर जोर देते हुए अरशद मदनी ने कहा कि मदरसे इस्लामिया धर्म और ईमान के रक्षक तथा धार्मिक पहचान के अमानतदार हैं. हालांकि, नई पीढ़ी के ईमान, आस्था और नैतिकता की रक्षा करना केवल मदरसों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि माता-पिता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
उन्होंने मुसलमानों से मौजूदा परिस्थितियों से निराश नहीं होने की अपील की. मदनी ने कहा कि मुसलमानों को सब्र, एकता, हिकमत और दृढ़ता के साथ अपने धर्म और ईमान पर मजबूती से कायम रहना चाहिए.
बता दें कि इससे पहले, अरशद मदनी ने पांच सितंबर को सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराए जाने की घटना पर गहरा अफसोस जताते हुए इसे संविधान, कानून के शासन और समान न्याय के सिद्धांत पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया था.
अरशद मदनी ने कहा था कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को गिराया जाना बेहद दुखद है. उनका कहना था कि इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह मूल सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं, तो उनके लागू होने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है.
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डीएससी
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