
New Delhi, 12 अक्टूबर . वरिष्ठ वकील और India के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने आरोप लगाया है कि India में कुछ विरोध-प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी दखल है. उन्होंने दावा किया कि सिस्टम को अस्थिर करने और देश को तरक्की करने से रोकने की कोशिशें की जा रही हैं.
के साथ एक साक्षात्कार में हरीश साल्वे ने कहा, “कुछ विदेशी देश, खासकर अमेरिका, India से खुश नहीं हैं. क्या इस बात में कोई संदेह है कि नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में उथल-पुथल के पीछे कौन था? शेख हसीना को किसने हटाया और वहां नया Prime Minister कौन लेकर आया? मेरी राय में इन घटनाओं के पीछे बाहरी ताकतें थीं.”
उन्होंने कहा, “India में भी कुछ लोग विरोध प्रदर्शनों के नेता बनकर सामने आए हैं, जिनमें यूट्यूबर्स भी शामिल हैं. कुछ लोग जर्मनी और दूसरे देशों में रहते हैं. वे इन गतिविधियों के लिए पैसा कहां से ला रहे हैं? प्रदर्शन आयोजित करने के लिए धन की जरूरत होती है. मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि पिछले छह से आठ महीनों में एक स्पष्ट पैटर्न दिखाई दिया है. जब मोदी Government होर्मुज संकट से निपटने, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और India की सैटेलाइट क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, तब ये समूह Government को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
साल्वे ने कहा, “मैंने पिछले छह से आठ महीनों में इस पैटर्न को देखा है. ऐसे आंदोलनों से निPatna Government की जिम्मेदारी है. मुझे नहीं लगता कि यह आंदोलन ज्यादा समय तक चलेगा, क्योंकि मेरी राय में यह जनता का वास्तविक आंदोलन नहीं है.”
उन्होंने कहा कि Government की जिम्मेदारी है कि वह विदेशी फंडिंग के आरोपों की जांच करे और उचित कार्रवाई करे. हालांकि, उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि क्या ये विरोध-प्रदर्शन लोगों की असली भावना को दर्शाते हैं.
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा है कि जांच शुरू की जाएगी. हालांकि, मैं इसे जन-आंदोलन नहीं मानता.”
साल्वे ने कहा कि उन्हें बड़े पैमाने पर जनता के विद्रोह का कोई सबूत नहीं दिखा. उन्होंने इन विरोध-प्रदर्शनों की तुलना परीक्षा के पेपर लीक होने पर हुए छात्र प्रदर्शनों से की, जिन्हें लोगों का समर्थन मिला था क्योंकि लोग छात्रों की मुश्किलों को समझते थे.
उन्होंने कहा, “मैं India में नहीं रहता और मैंने जो देखा है, उसके आधार पर मुझे बड़े पैमाने पर जनता का विद्रोह नहीं दिखता.”
साल्वे ने कहा, “आजकल यूट्यूब वीडियो, रील्स और एक लाइन के संदेशों के जरिए बातें फैलाई जा रही हैं. ऐसे दावे बार-बार दोहराए जा रहे हैं, जिन्हें मैं गलत मानता हूं.”
उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में दिल्ली Police की पीआर टीम का एक इंटरव्यू देखा था, जिसमें ऐसे दावों का बहुत अच्छे से जवाब दिया गया था.
साल्वे ने कहा कि Government को ऐसे आंदोलनों से सख्ती से निPatna चाहिए जिनका मकसद सिस्टम को अस्थिर करना हो. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह आंदोलन ज़्यादा समय तक चलेगा, क्योंकि वे इसे असली जन-आंदोलन से अलग मानते हैं.
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ओपी/एएस
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