
कराची, 22 सितंबर . Pakistan में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन ‘औरत मार्च’ ने पूर्व Prime Minister इमरान खान के पारिवारिक सदस्यों (जिसमें उनकी बहनें, भांजियां, भांजे और नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं) की गिरफ्तारी पर सख्त ऐतराज जताया है. Tuesday को एक बयान जारी कर संगठन ने इस कार्रवाई को Government द्वारा असहमति की आवाज को दबाने की एक “खौफनाक” कोशिश बताया.
‘औरत मार्च’ ने कहा कि खान के रिश्तेदारों को डराना-धमकाना, गिरफ्तार करना और “उठा ले जाना,” साथ ही Pakistan तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थकों को इस्लामाबाद की सड़कों पर मार्च करने से रोकने की कोशिशें “असंवैधानिक और अमानवीय” हैं.
Pakistan के अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पीटीआई के विरोध प्रदर्शन से पहले, इमरान खान की बहनों अलीमा खान, उज्मा खान और नोरिन नियाजी को हिरासत में लिया गया. लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने 30 दिन हिरासत का आदेश दिया था जिसके बाद ये कार्रवाई हुई.
13 सितंबर को, पीटीआई नेताओं ने 27 सितंबर को विरोध प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था. उनके मुताबिक इसका मकसद न सिर्फ इमरान खान की रिहाई की मांग करना है, बल्कि लोकतंत्र की बहाली और Pakistan में संविधान और कानून के राज को सुनिश्चित करने की भावना भी है.
एक्स पोस्ट में, समूह ने कहा कि पीटीआई विरोध प्रदर्शन से कुछ दिन पहले हुई ये गिरफ्तारियां पीटीआई और Pakistan भर में किसी भी रूप में विरोध कर रहे सभी आंदोलनों, संगठनों और Political समूहों के खिलाफ “सत्तारूढ़ तंत्र (एस्टेब्लिशमेंट) समर्थित हिंसक कदमों” की एक लंबी कड़ी का हिस्सा हैं.
‘औरत मार्च’ ने कहा, “हालांकि हम किसी Political पार्टी से नहीं जुड़े हैं और पिछले कुछ वर्षों में पीटीआई की कुछ नीतियों से असहमत भी रहे हैं, फिर भी हमारा मानना है कि असहमति के किसी भी रूप को कुचलने की Government की भयानक कोशिशें, इमरान खान के रिश्तेदारों को डराना-धमकाना और उठा ले जाना, और पीटीआई समर्थकों को इस्लामाबाद की सड़कों पर मार्च करने से रोकना असंवैधानिक और अमानवीय है, और सभी नागरिकों को इसकी निंदा करनी चाहिए.”
इसमें आगे कहा गया, “हर Pakistanी को शांतिपूर्ण विरोध करने और Government के सामने अपनी मांगें रखने का अधिकार है.”
Pakistanी मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और हादी अली चट्टा की दोबारा गिरफ्तारी, बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के नेताओं महरंग बलोच, गुलजादी बलोच और अन्य सदस्यों को उम्रकैद की सजा, और साथ ही बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और Pakistan के कब्जे वाले कश्मीर में Pakistanी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों का हवाला देते हुए, ‘औरत मार्च’ ने कहा कि ये घटनाएं सत्तारूढ़ तंत्र समर्थित सरकारी नैरेटिव को चुनौती देने वालों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई दर्शाती हैं.
इस बात पर जोर देते हुए कि Pakistan “लोकतंत्र, संविधान और प्रतिरोध के लिए बुरे दौर” से गुजर रहा है, समूह ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि हर Pakistanी, चाहे वो किसी भी Political विचारधारा से हो, Government जो कर रही है उसकी निंदा करने की हिम्मत दिखाएगा.”
–
केआर/
Skip to content