
तेल अवीव, 27 अक्टूबर . इजरायल में Tuesday को संसदीय चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. 73 लाख लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. जिनमें से 5 लाख से अधिक युवा पहली बार अपना वोट डालेंगे.
वर्तमान Prime Minister बेंजामिन नेतन्याहू का मुकाबला पूर्व सेना प्रमुख आइजनकोट से है. दोनों सेना से जुड़े रहे हैं और अपने करीबी जनों को जंग में खो चुके हैं. नेतन्याहू ने भाई योनातन को 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के अभियान में मारे गए तो 7 अक्टूबर के हमास हमलों में आइजनकोट ने अपना बेटा खोया.
बात करें इजरायली संसद की तो यहां कुल 120 सीटें हैं. Government बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है. देश के 76 साल के इतिहास में आज तक किसी भी Political पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं किया है.
से खास बातचीत में India में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने बताया कि इजरायल में लोग किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि पार्टी को चुनते हैं. चुनाव से पहले हर दल अपने दावेदारों की एक सूची बनाता है. पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी.
इजरायल की चुनावी प्रक्रिया ऐसी है कि किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से 3.25 फीसदी वोट हासिल करने होते हैं. इससे कम वोट मिलने पर दल को संसद में कोई सीट नहीं मिलती.
मतों की गिनती के बाद President तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका दिया जाए. उनके पास गठबंधन बनाने और आम सहमति जुटाने के लिए 28 दिन का समय होगा. 28 दिनों के बीच वे अन्य पार्टियों को अपने साथ गठबंधन में शामिल होने के लिए मना सकते हैं. अगर वे सफल नहीं होते हैं, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को गठबंधन बनाने का मौका मिलेगा और अगर ऐसा भी नहीं हो पाता है, तो 90 दिनों के भीतर फिर से मतदान होगा.
इस बीच इजरायल से जो तस्वीर आ रही है उसके मुताबिक छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट गठबंधन को ज्यादा सीटें दी गई हैं. वहीं नेतन्याहू के गठबंधन को एक में बढ़त और दूसरे में बहुमत मिलती दिख रही है.
7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए तीन साल के क्षेत्रीय युद्धों के साए में इजरायली नागरिक वोट डालेंगे. लोगों के लिए आंतरिक सुरक्षा, हरेदी समुदायों को सैन्य मामलों में विशेष छूट जैसे मुद्दे अहम हैं.
–
केआर/
Skip to content