इंडी गठबंधन पर जदयू नेताओं का तंज, कहा-‘इंडी गठबंधन का कोई भविष्य नहीं, इसे भंग कर देना चाहिए’

Mumbai , 22 अक्टूबर . बिहार में जदयू के नेताओं ने इंडी गठबंधन और यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन में कोई नेता एक साथ नहीं हैं, बस काम पड़ने पर एक साथ आ जाते हैं और काम होने पर एक दूसरे के विरोध में हो जाते हैं.

जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने समाचार एजेंसी से कहा कि इंडी गठबंधन को विघटित कर देना चाहिए. ये गठबंधन किस वजह से है? ये अब समझ से दूर हो गया है. गठबंधन के नेताओं में ही एक दूसरे के खिलाफ कई बार टकराव हुआ है. जब भी किसी राज्य में चुनाव होता है तो ये सब एक दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं.

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में कांग्रेस टीएमसी के खिलाफ थी और आज दोनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं. चुनाव के दौरान भाजपा और टीएमसी के बीच जैसा माहौल था, उससे कम कांग्रेस के साथ नहीं था. अगर India में कहीं भी चुनाव होगा तो इसी तरह स्थिति देखने को मिलेगी. फिर इस तरह का गठबंधन जिसमें मुद्दों पर सहमति नहीं हो, जिसमें नेतृत्व कौन करेगा, यहीं तय नहीं हो रहा है. चुनाव में कौन लड़ेगा, ये नहीं पता है तो ऐसे गठबंधन का मतलब ही क्या रह जाता है.

यूपी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे पर राजीव रंजन ने कहा कि Lok Sabha में जब सपा को 37 सीटें मिली थीं तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव भ्रम का शिकार हो गए थे. अब उनके भ्रम का निस्तारण हो रहा है, जनता अखिलेश की राजनीति में विकास को दूर-दूर तक नहीं देखती है, केवल उनको राजनीति ही दिखाई देती है. जतना को भी पता है कि उनके साथ कौन काम कर रहा है और कौन नहीं कर रहा है.

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कभी पी से पंडित और कभी पी से पिछड़ा कहकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं. वो इसी के सहारे लोगों को साधने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन जनता ने कभी इसको गंभीरता से नहीं लिया है, न ही आने वाले समय में कोई लेना वाला है. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है. प्रदेश में एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ की Government बनने जा रही है.

इंडी गठबंधन की बैठक को लेकर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि ये लोग केवल बैठक पर बैठक कर रहे हैं, बैठक में कॉफी पीते हैं और फिर उसके बाद अपने घर लौट जाते हैं. जनता से इनको कोई मतलब नहीं है, न इनका कोई विचार होता है, न ही इसका कोई कार्यक्रम रहता है. जनता से वे सभी लोग दूर हैं. जो जनता से दूर हो जाता है, वो राजनीति में भी बहुत दूर चला जाता है.

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पीएम