
Lucknow, 2 नवंबर . उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य ने ‘इंडिया’ गठबंधन के ‘चलो दिल्ली’ मार्च को लेकर Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और Samajwadi Party (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा.
उन्होंने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों को जुटाने का अपना लक्ष्य हासिल करने में विफल रहा और रैली में बहुत कम लोग पहुंचे. हालांकि, विपक्ष ने मौर्य पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अपने करियर और पार्टी के भीतर अपनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए.
केशव प्रसाद मौर्य ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वहां केवल दस हजार लोग ही पहुंचे. पूरा कार्यक्रम फ्लॉप साबित हुआ और जनता ने Prime Minister Narendra Modi की Government को गिराने की साजिशों को खारिज कर दिया है.
राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों नेता केवल शीर्ष संवैधानिक और Political पदों के ‘नकली’ दावेदार ही बन सकते हैं, और असल पदों तक पहुंचने में इन्हें 30 साल लग जाएंगे.
मौर्य ने कहा कि राहुल गांधी एक ‘नकली’ Prime Minister और अखिलेश यादव एक ‘नकली’ Chief Minister बन सकते हैं, लेकिन वे असली नहीं बन सकते. इन दोनों को इन पदों तक पहुंचने में 30 साल लगेंगे. जब तक ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता, तब तक कांग्रेस-सपा सत्ता में नहीं आएगी और भाजपा सत्ता से बाहर नहीं जाएगी. भाजपा ही India और उत्तर प्रदेश का वर्तमान और भविष्य है.
Samajwadi Party ने उपChief Minister की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के बजाय, उत्तर प्रदेश में भाजपा के Chief Minister पद के चेहरे के रूप में खुद को स्थापित करने पर ध्यान देना चाहिए.
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के भीतर चल रही आंतरिक राजनीति के कारण मौर्य को हाशिए पर धकेल दिया गया है.
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने से बातचीत में कहा कि मौर्य उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख नेता हैं, लेकिन सत्ताधारी दल के भीतर चल रही आंतरिक राजनीति की वजह से उन्हें किनारे कर दिया गया है.
वर्मा ने कहा कि केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के एक बहुत अच्छे नेता हैं, लेकिन भाजपा की आंतरिक राजनीति के कारण उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया है. मुझे उनके प्रति सहानुभूति है क्योंकि वे हाल के चुनावों में जीत नहीं पाए हैं. उन्हें इस चुनाव को जीतने पर ध्यान देना चाहिए, न कि ‘शैडो Prime Minister’ या ‘शैडो Chief Minister ’ बनने जैसी चर्चाओं में उलझना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि केशव प्रसाद मौर्य को कम से कम यह तो कहना चाहिए कि वही पार्टी की ओर से Chief Minister पद का चेहरा होंगे. दुर्भाग्य से पिछले 10 वर्षों में केशव के साथ जैसा बर्ताव किया गया है, खासकर भाजपा के भीतर एक पीडीए नेता के रूप में, वह शर्मनाक है.
सपा विधायक जाहिद बेग ने भी मौर्य के बयानों की आलोचना की. उन्होंने भाजपा में मौर्य की Political स्थिति पर सवाल उठाए और कहा कि उनके पास अपनी राय स्वतंत्र रूप से रखने की आजादी नहीं है.
से बातचीत में बेग ने कहा कि जनता केशव मौर्य को गंभीरता से नहीं लेती है. वह जो कुछ भी कहते हैं, उससे पहले उन्हें अपनी खुद की स्थिति, अपनी पार्टी और अपने मंत्रालय के बारे में सोचना चाहिए. अगर उनके पास अपनी मर्जी से बैठने या अपनी राय रखने की आजादी ही नहीं है तो फिर उनके बारे में क्या ही कहा जाए? इसलिए, जब तक जनता उन्हें गंभीरता से नहीं लेती, तब तक हमारे लिए उन पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.
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डीकेएम/डीकेपी
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