इंडिया गठबंधन की बैठक पर एनडीए नेताओं का हमला, कहा-सहयोगी दल सिर्फ बातों में हैं साथ

New Delhi, 30 सितंबर . एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर रणनीति बनाने को लेकर दिल्ली में बुलाई गई इंडिया गठबंधन की बैठक को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. बैठक में अखिलेश यादव के व्यक्तिगत रूप से ना शामिल होने और डीएमके और आम आदमी पार्टी द्वारा इस बैठक से दूरी बनाने को लेकर सत्ता पक्ष ने विपक्षी एकता पर बड़ा हमला बोला है. भाजपा और जदयू के नेताओं ने इसे स्वार्थ और मजबूरी का गठबंधन करार दिया है.

उत्तर प्रदेश Government के मंत्री दानिश आजाद ने इंडिया गठबंधन पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “इंडिया गठबंधन के सदस्य साथ बैठने को भी तैयार नहीं हैं और एक-दूसरे पर ही हमले कर रहे हैं. तो फिर यह कैसा गठबंधन है? असल में, यह एक ‘महा ठगबंधन’ है. इसे राज्य की जनता को गुमराह करने और अपने Political हित साधने के लिए बनाया गया है.” दानिश ने Samajwadi Party प्रमुख अखिलेश यादव के बैठक में शामिल न होने पर सवाल उठाते हुए कहा, “अखिलेश यादव ने खुद को बैठक से दूर कर लिया है. तो फिर इस गठबंधन का आधार क्या है? इसे गठबंधन बताने और पेश करने का आधार क्या है? Samajwadi Party हो, कांग्रेस पार्टी हो या इंडिया अलायंस की कोई और पार्टी, उनके दावे जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं.”

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी विपक्षी एकता को खंड-खंड होने वाला गठबंधन बताया. उन्होंने कहा, “ये स्वार्थ का गठबंधन है. जब-जब चुनाव आता है या विपक्ष बुरी तरीके से पराजित होता है तो संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाना, चुनाव आयोग पर उंगली उठाना, ईडी पर उंगली उठाना इन लोगों की नियत ही बन गई है. अगर कांग्रेस के मन मुताबिक फैसले नहीं होते हैं तो वे संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाते हैं.” उन्होंने कहा, “ये महागठबंधन भी खंड-खंड होने की स्थिति में है. डीएमके नहीं जा रही है, अखिलेश यादव नहीं जा रहे हैं, लेकिन कोई जाए भी तो उससे कोई अंतर नहीं पड़ता.”

सरावगी ने कहा, “एसआईआर हो या वोटर लिस्ट के मामले में अगर कोई ठोस आपत्ति है तो बताएं, उस पर भी चुनाव आयोग विचार करेगा. लेकिन अनर्गल प्रलाप करना, अनर्गल बयानबाजी करना ठीक नहीं है. एसआईआर के बाद एक महीने का समय दिया जाता है आपत्ति दर्ज करने के लिए. किसी का नाम गलत कटा है तो उसे जुड़वाने का प्रावधान है, लेकिन आपत्तियां दर्ज नहीं हो रही हैं और फालतू में कांग्रेस हंगामा कर रही है.”

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “बंगाल में भी जिन 10 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, उनमें से 6 से अधिक पर ममता बनर्जी और कांग्रेस ही जीती है. हालांकि जहां जीतते हैं वहां ये सब कुछ ठीक बताते हैं और जहां हारते हैं, वहां चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना शुरू कर देते हैं. यह इनकी पुरानी रणनीति है. गठबंधन वाले अपनी बैठक करें, इससे कोई अंतर नहीं पड़ने वाला है.”

बिहार Government के मंत्री रामकृपाल यादव ने चुटकी लेते हुए कहा, “इंडिया गठबंधन में कौन-कौन सी पार्टी है? कौन है इसमें? कोई जानता भी नहीं है, नाम भी नहीं जानता है. एक तो होगी Samajwadi Party और उसका पिछलग्गू है कांग्रेस पार्टी और सब तो ना के बराबर है, क्या होगा इन सबसे? कुछ नहीं होने वाला है.”

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इनको कोई जानता भी नहीं है और ये सब रामलीला मंडली के सदस्य हैं, वही सब एक जगह इकट्ठा हो रहा है. जब बरसात आती है, बाढ़ आती है तो कई तरह के सांप-बिच्छू जान बचाने के लिए एक जगह पर चढ़ जाते हैं. तो ये सब भी बाढ़ आ गया है, जान बचाने के लिए इकट्ठा होने की कोशिश कर रहे हैं.”

वहीं, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा, नाम इंडिया गठबंधन है, लेकिन यह गठबंधन सिर्फ जिद पर टिका है. कांग्रेस अपनी जिद की वजह से अब तक गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं चली है और उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ता है.” उन्होंने कहा, “जो पार्टियां उनके साथ हैं, वे न तो पूरे दिल से और न ही भावना से उनके साथ हैं. अगर कहीं हैं तो वे सिर्फ बातों-बातों में उनके साथ हैं और इसका कोई मतलब नहीं है.”

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