
New Delhi, 7 अक्टूबर . Supreme Court ने कहा कि किसी आरोपी से हिरासत में पूछताछ (कस्टोडियल इंटरोगेशन) की जानी चाहिए या नहीं, इस बारे में हाई कोर्ट को कोई सुझाव या निर्देश नहीं देना चाहिए. शीर्ष अदालत ने कहा कि पूछताछ का तरीका तय करना जांच एजेंसी के विवेक पर छोड़ना चाहिए.
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने एक दंपति को अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की. दंपति पर एक स्कूल के प्राचार्य के सेवा रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर उनकी जन्मतिथि बदलने और सेवानिवृत्ति अवधि बढ़ाने का आरोप है.
Supreme Court मितेशगिरी उर्फ मुलराजगिरी सेवागिरी गोस्वामी और इलाबेन मितेशगिरी गोस्वामी द्वारा Gujarat हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी.
Gujarat हाई कोर्ट ने 16 जून 2026 को दिए अपने आदेश में कहा था, “सच्चाई सामने लाने के लिए केवल आवेदक ही नहीं, बल्कि अन्य सभी संदिग्धों से भी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है.” इसी आधार पर हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था.
हालांकि, Supreme Court ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि किसी आरोपी से किस प्रकार पूछताछ की जानी चाहिए, यह सुझाव देना हाई कोर्ट का काम नहीं है.
न्यायमूर्ति भुइयां की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हमारा स्पष्ट मत है कि किसी आरोपी से किस प्रकार पूछताछ की जाए, इसका सुझाव देना हाई कोर्ट का काम नहीं है. यह निर्णय जांच एजेंसी के विवेक पर छोड़ा जाना चाहिए.”
Supreme Court ने यह भी कहा कि हिरासत में पूछताछ को लेकर इस तरह की व्यापक टिप्पणियां उन लोगों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती हैं जिन्हें मामले में अभी आरोपी भी नहीं बनाया गया है.
अदालत ने कहा, “इस तरह की टिप्पणी कि केवल आवेदक ही नहीं बल्कि सभी संदिग्धों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है, अन्य संदिग्धों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है. हाई कोर्ट को ऐसी अनावश्यक टिप्पणियों से बचना चाहिए.”
Supreme Court ने मामले के आरोपों की प्रकृति का भी परीक्षण किया और कहा कि प्राथमिकी (First Information Report ) मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है.
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि अपीलकर्ताओं ने पहले अपीलकर्ता के सेवा रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर उनकी जन्मतिथि 19 जून 1964 से बदलकर 19 जून 1965 कर दी, जिससे उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख बदल गई और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाकर अनुचित लाभ प्राप्त किया गया.
पहले अपीलकर्ता श्री सेकेंडरी स्कूल, वेकारिया के प्राचार्य थे, जबकि दूसरी अपीलकर्ता स्कूल की प्रबंधन समिति की अध्यक्ष थीं.
इस मामले में Gujarat के जूनागढ़ जिले के विसावदर Police थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत First Information Report दर्ज की गई थी.
न्यायमूर्ति भुइयां की पीठ ने कहा, “अपीलकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, जो पूरी तरह दस्तावेजों पर आधारित हैं, हम मानते हैं कि उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक नहीं है.”
Supreme Court ने 25 अगस्त को अंतरिम आदेश देते हुए कहा था कि जांच में सहयोग करने की शर्त पर अपीलकर्ताओं को गिरफ्तार न किया जाए.
बाद में Gujarat Government की ओर से दाखिल हलफनामे का अवलोकन करने के बाद शीर्ष अदालत ने गिरफ्तारी से संरक्षण देने वाले अपने अंतरिम आदेश को स्थायी कर दिया और अपीलकर्ताओं को जांच में सहयोग जारी रखने का निर्देश दिया.
Gujarat हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए Supreme Court ने अपील स्वीकार कर ली.
–
एएमटी/डीकेपी
Skip to content