आरबीआई ने विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व के दायरे और गणना को लेकर जारी किया एफएक्यू

Mumbai , 15 अक्टूबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने Thursday को अपने 20 प्रतिशत विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व (एफईआरआर) के दायरे और गणना को लेकर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) का एक सेट जारी किया. इसमें कुछ हेजिंग सौदों को छूट देने और ऑप्शंस तथा आगे बढ़ाए गए (रोल-ओवर) अनुबंधों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को भी स्पष्ट किया गया है.

आरबीआई ने कहा कि एफईआरआर उन उपयोगकर्ता अनुबंधों पर लागू होगा, जिनकी राशि 20 लाख डॉलर के बराबर से अधिक है और जिनमें उपयोगकर्ता चालू खाते के लेनदेन से जुड़े जोखिमों से बचाव (हेजिंग) के लिए रुपए के बदले विदेशी मुद्रा खरीदता है. रुपए के बदले विदेशी मुद्रा बेचने वाले अनुबंधों के साथ-साथ पूंजी खाते के लेनदेन की हेजिंग करने वाले अनुबंधों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.

एफएक्यू में कहा गया, “एफईआरआर की आवश्यकता उन निर्दिष्ट डेरिवेटिव अनुबंधों पर लागू होती है, जो अधिकृत डीलरों द्वारा ऐसे उपयोगकर्ताओं के साथ किए जाते हैं, जिनका सांकेतिक मूल्य 20 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर से अधिक है. इसलिए, अधिकृत डीलर द्वारा किसी उपयोगकर्ता के साथ किया गया ऐसा डेरिवेटिव अनुबंध, जिसका सांकेतिक मूल्य 20 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर या उससे कम है, इस आवश्यकता के अधीन नहीं होगा. हालांकि, अधिकृत डीलरों को इन प्रावधानों से बचने के लिए डेरिवेटिव लेनदेन की संरचना में किसी भी तरह की हेराफेरी के प्रयासों से सतर्क रहना होगा.”

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि एफईआरआर उन डेरिवेटिव अनुबंधों पर भी लागू नहीं होगा, जिन्हें उपयोगकर्ता पूंजी खाते के लेनदेन से उत्पन्न होने वाले अपने चालू खाते के भुगतान संबंधी जोखिमों से बचाव के लिए करते हैं. इनमें बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) पर ब्याज, अनिवासियों के पास मौजूद निवासी ऋण साधनों पर कूपन भुगतान या गैर-निवासी निवेशकों को दिए जाने वाले लाभांश जैसे भुगतान शामिल हैं. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के नियमों के तहत ये चालू खाते के लेनदेन माने जाते हैं.

आरबीआई ने कहा कि एफईआरआर की आवश्यकता केवल रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों पर लागू होती है. भारतीय मुद्रा से जुड़े बिना किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध इसके दायरे में नहीं आते हैं.

हालांकि, इन जोखिमों से उत्पन्न मुद्रा संबंधी जोखिमों से बचाव के लिए बैंकों द्वारा किए जाने वाले पात्र हेजिंग सौदों पर रिजर्व की आवश्यकता पहले की तरह लागू रहेगी.

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एफईआरआर की राशि प्रत्येक लागू डेरिवेटिव अनुबंध की सांकेतिक राशि के भारतीय रुपए में समतुल्य मूल्य का 20 प्रतिशत होगी.

उदाहरण के लिए, यदि रुपए के मुकाबले 95 रुपए प्रति अमेरिकी डॉलर की अनुबंधित दर पर 1 करोड़ डॉलर की सांकेतिक राशि वाला डेरिवेटिव अनुबंध किया जाता है, तो उसकी सांकेतिक राशि 95 करोड़ रुपए होगी. ऐसे में लागू एफईआरआर की राशि 19 करोड़ रुपए होगी.

एफईआरआर को रिजर्व बैंक के पास अधिकृत डीलर के चालू खाते में जमा करना और बनाए रखना होगा. इस रिजर्व को प्रतिदिन बनाए रखना अनिवार्य है.

किसी विशेष डेरिवेटिव अनुबंध पर लागू एफईआरआर को अनुबंध किए जाने की तारीख के तुरंत बाद आने वाले कार्यदिवस से बनाए रखना होगा. यह व्यवस्था प्रत्येक ऐसे डेरिवेटिव लेनदेन पर अलग-अलग, सकल आधार पर लागू होगी.

आरबीआई ने आगे बताया कि अधिकृत डीलरों को पात्र लेनदेन और उनसे जुड़े एफईआरआर का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा. इन रिकॉर्ड का ऑडिट भी किया जाएगा.

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकृत डीलरों द्वारा रिजर्व बैंक के पास बनाए रखे गए एफईआरआर पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा. किसी विशेष डेरिवेटिव अनुबंध के लिए लागू एफईआरआर को उस अनुबंध की समाप्ति के एक दिन बाद तक बनाए रखना आवश्यक होगा.

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एबीएस