
पानीहाटी, 17 अक्टूबर . आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को Supreme Court से जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता शेखर रंजन देबनाथ ने न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि मामले में गवाहों की गवाही पूरी होने की रफ्तार बेहद धीमी है, जिसके कारण सुनवाई में तेजी नहीं आ रही है.
शेखर रंजन देबनाथ ने कहा कि मामले में कुल 147 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल सात गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है. उन्होंने इसके लिए सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी ने अपना काम ठीक से नहीं किया. इसी वजह से अदालत में सुनवाई तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही है.
संदीप घोष को Supreme Court से जमानत मिलने पर पीड़िता के पिता ने कहा कि Supreme Court अपना फैसला सुना चुका है. सीबीआई ने अपना काम ठीक से नहीं किया है, यही वजह है कि अदालती सुनवाई तेजी से नहीं हो रही है. आरोपी को दो साल तक जेल में रखा गया, लेकिन उसके बाद उसे जमानत दे दी गई.
बता दें कि अगस्त 2024 में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद, आरजी कर अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आई थीं. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस Government के दौरान संदीप घोष आरजी कर के प्रिंसिपल थे. सीबीआई ने राज्य द्वारा संचालित इस मेडिकल संस्थान में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में संदीप घोष को गिरफ्तार किया था. इसके बाद पीड़िता के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत में प्रभावशाली लोग शामिल थे.
कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, संदीप घोष ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया था. Friday को राहत देते हुए, Supreme Court की खंडपीठ ने मुकदमे की धीमी प्रगति पर गौर किया. पीठ ने पाया कि हालांकि संदीप घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, लेकिन इस मामले में बताए गए 147 गवाहों में से केवल कुछ ही लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं. लंबे समय तक जेल में रहने और कानूनी कार्यवाही की धीमी गति को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने संदीप घोष को जमानत दे दी. इस फैसले के बाद, पीड़िता के पिता ने पश्चिम बंगाल में एक और विरोध प्रदर्शन शुरू होने का संकेत दिया है.
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