
New Delhi, 29 अगस्त . आरक्षण को लेकर जारी बहस पर Union Minister जीतन राम मांझी ने कहा कि 2024 में Supreme Court के आदेश पर एससी कोटे में सब-कोटा होना चाहिए, क्योंकि 80 सालों से आरक्षण का 90 फीसदी लाभ कुछ वर्ग ही ले रहे हैं जबकि नीचे तबके के लोग 10 फीसदी में सीमित हैं. उन्होंने कहा कि पंजाब, कर्नाटक और तमिलनाडु की तरह बिहार में भी दलित-महादलित के आधार पर आरक्षण में आरक्षण किया जाना उचित है.
आरक्षण को लेकर जारी बहस पर Union Minister जीतन राम मांझी ने कहा, “जो बहस चल रही है, वह स्वतः नहीं है. 2024 में Supreme Court ने विपक्ष के अलावा सर्वसम्मति से एक सुझाव दिया या निर्णय लिया है कि राज्य चाहे तो एससी कोटा में भी सब-कोटा, यानी कि डिवीजन कर सकता है. इसके तहत India के कई राज्यों में, पंजाब, कर्नाटक, और तमिलनाडु ने आरक्षण के अंदर आरक्षण की बात की. उससे फायदा यह हुआ है कि जो एससी के आरक्षण का लाभ कुछ वर्ग के लोग ले रहे थे, वो 80 सालों से लेते आ रहे हैं. सभी पोस्ट पर 90 फीसदी वही लोग हैं. वहीं, जो नीचे तबके के लोग हैं आर्थिक दृष्टिकोण से, शैक्षणिक दृष्टिकोण से, वो 10 फीसदी में सीमित हैं.
उन्होंने आगे कहा कि उदाहरण के लिए पंजाब में क्लास वन में जब बंटवारा नहीं था, तो सात-आठ जातियां थीं, और वो 95 फीसदी उसका लाभ ले रही थीं, लेकिन जब बंटवारा हुआ और फिर नियुक्तियां हुईं, तो वही सात-आठ जातियां जो 95 फीसदी थीं, वो 45 फीसदी में और नीचे वाले 55 फीसदी में चले गए, जिसको लाभ नहीं मिल रहा था, उसको लाभ मिलना शुरू हो गया.
Union Minister ने आगे कहा कि उसी आधार पर बिहार में भी बना था दलित और महादलित. उसका आधार भी यही था कि जो लाभ ले चुके हैं, वो एससी में रहेंगे, आरक्षण हटाने की कोई बात नहीं है. उनको यथावत आरक्षण का लाभ मिलते रहेगा. लेकिन बाकी जो 18 जातियां यहां हैं, जो शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टिकोण से कमजोर हैं, उनके लिए कोई विशेष प्रावधान किया जाएगा, और उनको अलग से आरक्षण दिया जाएगा ताकि वो भी जो पहले से आगे बढ़े हुए लोग हैं, उनके साथ हो जाएं.
उन्होंने कहा कि कहने का मतलब कि Supreme Court के आदेश के आलोक में आरक्षण में सब-बंटवारा होना चाहिए, सब-डिवीजन होना चाहिए, जिससे कि नीचे तबके के लोग जो अभी तक 80 वर्ष की आजादी के बाद भी लाभ नहीं ले सके, उनको लाभ देने की बात है. यह नैचुरल जस्टिस की बात है, ज्यूडिशियल जस्टिस की बात है. अगर इसको कोई समझता है कि इससे आरक्षण हटाने की बात है, तो वह भ्रम में डालता है लोगों को. आरक्षण हटाने की बात नहीं है, आरक्षण में सिर्फ जनसंख्या के आलोक में बंटवारा करने की बात है, जो कि सर्वथा उचित है, क्योंकि India के Supreme Court ने भी 2024 में उसका आदेश दिया है.
Union Minister चिराग पासवान के बयान पर Union Minister मांझी ने कहा, “चिराग पासवान देहात में कहा जाते हैं. वह सोने का चम्मच लेकर के पैदा हुए हैं. उनको क्या पता है कि झोपड़ी में रहने वाले, ताड़ के खगड़ा में रहने वाले, गंदी बस्ती में रहने वाले, भूखे रहने वाले, नंगे रहने वाले, उन लोगों के बच्चे पढ़ नहीं रहे हैं, उनकी साक्षरता दर 15 फीसदी से कम है और उन लोगों की साक्षरता दर 40 फीसदी से ऊपर है.
उन्होंने आगे कहा कि जहां 7, 8 और 10 फीसदी जिसकी साक्षरता दर है, उसको लाभ देने के लिए आरक्षण में भी आरक्षण किया जाना सर्वथा उचित है. इसे Supreme Court ने माना है. उन्हें समझ में आ रहा है कि आरक्षण में कोई बाधा नहीं डालेगा. हम भी कहते हैं कि आरक्षण में कोई बाधा नहीं डालेगा.
Union Minister ने कहा कि मैं तो यही कहता हूं कि शायद वे आरक्षण में कोटा की बात को समझ नहीं पाए हैं, इसलिए ऐसा बोलते हैं.
Chief Minister सम्राट चौधरी को हटाने की बात को लेकर उन्होंने कहा कि ये कहां से बात आ गई? किसने ऐसा कहा? सम्राट चौधरी को हटाने की बात कैसे आ सकती है? सम्राट चौधरी विधिवत काम कर रहे हैं, नीतीश कुमार का आशीर्वाद है, हमारे Narendra Modi का आशीर्वाद है, एनडीए के सर्वसम्मत नेता के रूप में चुने गए हैं, और काम भी अच्छा कर रहे हैं. तो हटाने की बात करके ये लोग गलतफहमी फैलाना चाहते हैं और राज्य में अस्थिरता की स्थिति लाना चाहते हैं. ऐसा कहने वाले राज्य के दुश्मन हैं.
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डीकेपी
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