आरएसएस प्रचारक मारपीट मामला: एनएचआरसी ने राजस्थान के मुख्य सचिव और डीजीपी को जारी किया नोटिस

New Delhi, 13 अक्टूबर . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने Rajasthan के jaipur ग्रामीण जिले के नारायणा थाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सांभर जिला प्रचारक कृष्ण अवतार के साथ कथित हिरासत में यातना और Police बर्बरता के मामले का संज्ञान लिया है.

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने Rajasthan के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और Police महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा को नोटिस जारी किया है. आयोग ने दोनों अधिकारियों को आरोपों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने का निर्देश दिया है.

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को आयोग के समक्ष दायर शिकायत के आधार पर की गई है.

एनएचआरसी ने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह हिरासत में हिंसा का गंभीर मामला होगा, जिसमें शारीरिक यातना, जबरन कपड़े उतरवाना, अपमानित करना और Police हिरासत में मौजूद व्यक्ति को जानबूझकर चोट पहुंचाना शामिल है.

यह शिकायत लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (एलआरओ) के संयोजक विनय जोशी ने दायर की है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि Saturday रात कृष्ण अवतार को Policeकर्मियों ने फुलेरा जाते समय जबरन हिरासत में लिया और बाद में नारायणा थाने में उनके साथ गंभीर मारपीट की.

शिकायत के अनुसार, यह कथित हमला थाना प्रभारी (एसएचओ) उमराव सिंह के निर्देश पर किया गया. इसमें उप निरीक्षक ओंकार सिंह और अन्य Policeकर्मी अजय, रमेश, कुलदीप, महिपाल और विनोद शामिल थे.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि Policeकर्मियों ने कृष्ण अवतार के कपड़े जबरन उतरवाए, उनके हाथ-पैर बांधे और बार-बार मारपीट की. विशेष रूप से उनके निजी अंगों को निशाना बनाया गया.

यह भी आरोप है कि मारपीट के दौरान कृष्ण अवतार बेहोश हो गए थे और होश में आने के बाद भी उनके साथ हिंसा जारी रखी गई.

शिकायतकर्ता के अनुसार, घायल आरएसएस प्रचारक को पहले एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में गंभीर हालत में jaipur के सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल में भर्ती कराया गया.

एनएचआरसी ने कहा कि ये आरोप Police अधिकारों के दुरुपयोग, हिरासत संबंधी सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

आयोग ने कहा कि कई Police अधिकारियों की कथित संलिप्तता, हमले की गंभीरता, पीड़ित का बेहोश होना और अस्पताल में भर्ती किए जाने जैसी परिस्थितियां निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग करती हैं.

आयोग ने कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानव गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा. साथ ही संबंधित कानूनों के तहत आपराधिक जिम्मेदारी भी बनती है.

एनएचआरसी ने यह भी कहा कि नागरिकों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले Policeकर्मियों द्वारा की गई हिरासत में हिंसा को केवल विभागीय अनुशासनहीनता मानकर नहीं छोड़ा जा सकता.

आयोग ने इस मामले में छह Policeकर्मियों के निलंबन की खबर का भी संज्ञान लिया है. हालांकि, उसने कहा कि विभागीय कार्रवाई से अलग इस मामले में आपराधिक जांच भी जरूरी है.

आदेश में कहा गया, “आयोग स्पष्ट करता है कि जहां संज्ञेय अपराध के आरोप हों, वहां केवल निलंबन को आपराधिक जांच और जवाबदेही का विकल्प नहीं माना जा सकता.”

एनएचआरसी ने डीजीपी राजीव कुमार शर्मा से कृष्ण अवतार को हिरासत में लेने की परिस्थितियों, समय, कारण, कानूनी अधिकार, दर्ज First Information Report या शिकायत तथा गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े आवश्यक नियमों के पालन का विस्तृत विवरण मांगा है.

डीजीपी को जबरन कपड़े उतरवाने, शारीरिक रूप से बांधने, बार-बार मारपीट, निजी अंगों पर चोट और बेहोशी के आरोपों की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं. साथ ही शिकायत में नामित एसएचओ, उपनिरीक्षक और अन्य Policeकर्मियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा गया है.

आयोग ने यह भी पूछा है कि इस मामले में कोई First Information Report दर्ज हुई है या नहीं, किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, आरोपी कौन हैं और जांच की वर्तमान स्थिति क्या है.

यदि First Information Report दर्ज नहीं हुई है, तो अधिकारियों से इसका कारण बताने और उचित आपराधिक कार्रवाई के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है.

एनएचआरसी ने छह Policeकर्मियों के निलंबन से जुड़े आदेशों, विभागीय जांच की स्थिति और समानांतर रूप से शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई का विवरण भी मांगा है.

आयोग ने डीजीपी से पीड़ित की चोटों, चिकित्सीय जांच रिपोर्ट, स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और एसएमएस अस्पताल में हुए उपचार, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सहायता की जानकारी देने को कहा है. साथ ही सभी मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं.

सबूतों को सुरक्षित रखने पर जोर देते हुए एनएचआरसी ने संबंधित अवधि की cctv फुटेज, थाने के प्रवेश और निकास द्वार, गलियारों और लॉकअप क्षेत्र की रिकॉर्डिंग तुरंत सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.

इसके अलावा स्टेशन डायरी, हिरासत रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर, वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड, आधिकारिक संचार और अन्य संबंधित दस्तावेज भी सुरक्षित रखने को कहा गया है ताकि उनमें किसी तरह की छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट न किया जा सके.

आयोग ने विशेष रूप से कहा है कि यदि कोई cctv फुटेज गायब, डिलीट या उपलब्ध नहीं है तो उसके कारणों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए.

एनएचआरसी ने राज्य Police प्रमुख को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि मारपीट में शामिल, उसे निर्देशित करने वाले, सहयोग करने वाले या मामले को दबाने वाले हर Police अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी की जांच हो.

आयोग ने कृष्ण अवतार, उनके परिवार और गवाहों को धमकी, दबाव या हस्तक्षेप से बचाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है.

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को अलग से निर्देश दिया गया है कि पीड़ित को तत्काल और उचित चिकित्सा उपचार, विशेष स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए तथा उसकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी की जाए.

राज्य Government को कथित हिरासत यातना की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने तथा उसकी रिपोर्ट के आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने को भी कहा गया है.

एनएचआरसी ने मुख्य सचिव को प्रशासनिक जवाबदेही तय करने, पर्यवेक्षण संबंधी लापरवाही, कर्तव्य में चूक और कथित हिरासत हिंसा को रोकने या रिपोर्ट करने में विफल रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है.

Rajasthan Government से पीड़ित और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने, आवश्यक राहत उपलब्ध कराने और अंतरिम मुआवजे की संभावना पर भी विचार करने को कहा गया है.

आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों को निर्देश दिया है कि वे आपराधिक और विभागीय कार्रवाई, चिकित्सा सहायता, पीड़ित संरक्षण, मुआवजा और सुधारात्मक कदमों से संबंधित सभी दस्तावेजों सहित अपनी-अपनी कार्रवाई रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करें.

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एएमटी/डीकेपी