
Mumbai , 12 अक्टूबर . शिवसेना (यूबीटी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने Monday को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. उन्होंने इस्तीफे के बाद पार्टी की कार्यशैली और कुछ मुद्दों पर उसके रुख को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आनंद दुबे ने कहा कि Political दलों के बीच मतभेद और विचारों में असहमति हो सकती है, लेकिन जब देश की बात आती है तो राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए.
उन्होंने कहा, “देश सबसे पहले आता है. पार्टी बाद में आती है और व्यक्ति उससे भी बाद में. पहलगाम आतंकी हमले के बाद मैं अपने सहयोगी गुलाबचंद मोरे के साथ वहां गया था. मैंने फारूक अब्दुल्ला और उपGovernor मनोज सिन्हा से मुलाकात कर भरोसा दिलाया था कि हमारी पार्टी उनके साथ खड़ी है.”
दुबे ने कहा कि वह भले ही कोई बड़े पद पर नहीं रहे हों, लेकिन उनमें बालासाहेब ठाकरे के विचारों से प्रेरित एक शिवसैनिक की भावना हमेशा रही है. देश पर संकट आने पर सभी Political दलों को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए. उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके आदर्श शरजील इमाम, उमर खालिद या ध्रुव राठी नहीं हैं, बल्कि वे उन लोगों को अपना नायक मानते हैं, जिन्होंने देश और समाज के लिए साहसिक कार्य किए हैं.
आनंद दुबे ने कहा, “राजनीति कीजिए, Government की आलोचना कीजिए, महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन कीजिए, लेकिन देश के खिलाफ खड़े मत होइए.”
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पार्टी छोड़ना उनके लिए बेहद पीड़ादायक फैसला है. पार्टी हमारे लिए मां और घर की तरह होती है. जब कोई व्यक्ति अपना घर छोड़ता है तो दुख होना स्वाभाविक है. मुझे भी बहुत दुख है, लेकिन जहां विचार और दिल नहीं मिलते, वहां आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है.
दुबे ने कहा कि उन्होंने 2024 विधानसभा चुनाव और Mumbai महानगरपालिका की राजनीति में पार्टी के लिए पूरी ताकत से काम किया, बावजूद इसके उन्हें अपेक्षित सम्मान और सहयोग नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के लिए ईमानदारी से काम करने के बाद भी जब उन्होंने इस्तीफे की बात कही तो पार्टी की तरफ से किसी ने मेरा दुख भी नहीं पूछा.
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एएमटी/एबीएम
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