
New Delhi, 6 सितंबर . सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने आदिवासियों के सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए केंद्र Government पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र Government आदिवासियों के खिलाफ अघोषित युद्ध चला रही है और उनके संवैधानिक अधिकारों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है.
आदिवासियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने केंद्र Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि संघर्ष के आह्वान का मंच है.
वृंदा करात ने कहा, “ये बहुत ही महत्वपूर्ण सम्मेलन है. देश के अलग-अलग गांव और प्रदेशों से आदिवासियों के प्रतिरोध संघर्ष, अपने जल, जंगल, और जमीन के लिए लड़ा जा रहा है, के प्रतिनिधि एक मंच पर आए हैं.”
उन्होंने केंद्र Government की नीतियों को आदिवासी विरोधी करार दिया. करात ने कहा कि Government आदिवासियों के ऊपर अघोषित युद्ध चला रही है. उनके संवैधानिक अधिकारों और उनके लिए बने कानूनी ढांचे पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. Government लगातार नीतियों में संशोधन कर उनके हक को कमजोर कर रही है.
आदिवासी शिक्षा के मुद्दे पर वृंदा करात ने Government के दावों की पोल खोली. उन्होंने कहा कि जेन-जी की बात तो बहुत होती है, लेकिन आदिवासी जेन-जी के हॉस्टल्स, उनके स्कूलों की हालत बहुत खराब है. Government एकलव्य मॉडल स्कूलों को लेकर ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. आधे से ज्यादा घोषणाएं अमल में ही नहीं लाई जा रही हैं.
करात ने कहा कि जो थोड़ा-बहुत पढ़ाया भी जा रहा है, वो आदिवासी संस्कृति से कोसों दूर है. उनकी भाषा, उनका इतिहास, उनकी परंपरा को शिक्षा से गायब किया जा रहा है, जो उनकी पहचान को मिटाने की कोशिश है.
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन इसी अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का सम्मेलन है. देश भर से आए आदिवासी प्रतिनिधि यहां अपने संघर्षों के अनुभव साझा कर रहे हैं और आगे की रणनीति तय कर रहे हैं.
वृंदा करात ने अंत में कहा, “इसलिए ये संघर्ष का आह्वान है. ये नीति बदलने और अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष का सम्मेलन है. जब तक जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों के अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी.” उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों के बीच जिस प्रकार के हिंदुत्व की बातें करने का प्रयास कर रहे हैं, वो उसे बिल्कुल नहीं पसंद कर रहे हैं.
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डीकेपी
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