आतंकवाद से निपटने के लिए भारत और ऑस्ट्रेलिया का जंगल से समुद्र तक संयुक्त सैन्य अभ्यास

New Delhi, 25 अक्टूबर India और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक जंगलों, द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्र तटों पर एक साथ युद्धाभ्यास कर रहे हैं. इस दौरान दोनों देशों के सैनिक आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम दे रहे हैं. पानी में युद्ध कौशल और ड्रोन संचालन का अभ्यास भी कर रहे हैं. दोनों देशों की सेनाओं के बीच यह संयुक्त प्रशिक्षण बदलती युद्ध परिस्थितियों में बेहतर तालमेल और अभियान संबंधी क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित है.

भारतीय सेना ने Sunday को बताया कि दोनों देशों के सैनिक अलग-अलग तरह के भौगोलिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण ले रहे हैं. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिलकर काम करने की क्षमता विकसित की जा सके. इस संयुक्त अभ्यास में जंगल, द्वीपीय क्षेत्र और समुद्र तटीय इलाकों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. सैनिक शारीरिक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यासों के साथ आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने की रणनीतियों पर काम कर रहे हैं.

इसके अलावा, पानी में तैरकर सैन्य अभियान चलाने और ड्रोन के संचालन का अभ्यास भी किया जा रहा है. अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल को बेहतर बनाना है. India और ऑस्ट्रेलिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ का आयोजन 19 अक्टूबर से 1 नवंबर तक किया जा रहा है. 14 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में भारतीय सेना की गढ़वाल राइफल्स और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के सैनिक हिस्सा ले रहे हैं.

संयुक्त अभियानों के दौरान सैनिकों के लिए एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझना और परिस्थितियों के अनुसार मिलकर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होता है. ऐसे प्रशिक्षण से सैनिकों को विभिन्न परिस्थितियों में एक साथ काम करने और अभियान संबंधी तैयारियों को मजबूत करने का अवसर मिल रहा है. ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ के जरिए India और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं अपनी युद्धक तैयारियों को बेहतर बनाने के साथ आपसी विश्वास और सैन्य सहयोग को भी मजबूत कर रही हैं.

यह अभ्यास दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. दोनों देशों के सैनिक युद्धक तैराकी, रस्सी के सहारे तेजी से नीचे उतरने, घात लगाकर हमला करने और ड्रोन चलाने का अभ्यास कर रहे हैं. भारतीय सेना ने बताया कि अभ्यास के दौरान सैनिक जंगलों, द्वीपों और तटीय क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की सैन्य गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं. इन गतिविधियों के जरिए उन्हें बदलते हालात के अनुसार निर्णय लेने और एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर काम करने का अनुभव मिल रहा है.

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जीसीबी/पीएम