
New Delhi, 23 सितंबर . Pakistan के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले स्वीकार किया था कि उनके देश की Governmentें 30 वर्षों से आतंकवादियों का समर्थन करती रही हैं. उनका यह बयान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए हमले के कुछ दिनों बाद आया था, जिसमें 26 नागरिकों की जान चली गई थी. अब Prime Minister शहबाज शरीफ ने खुद संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि उनके देश में आतंकवादी मौजूद रहे हैं, लेकिन अब उन पर नियंत्रण पा लिया गया है.
Pakistan की ओर से आतंकवाद के खिलाफ अपना रवैया बदलने के दावे विश्वसनीय रिपोर्टों और ऐतिहासिक घटनाओं के मद्देनजर सवालों के घेरे में हैं. ऐसी रिपोर्टें सामने आती रही हैं, जिनमें Pakistanी सेना के कुछ तत्वों पर लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को ट्रेनिंग, सुरक्षित ठिकाने और अन्य सहायता देने के आरोप लगाए गए हैं.
करीब चार महीने पहले कुछ तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें Prime Minister के Political मामलों के सलाहकार और अंतर-प्रांतीय समन्वय मामलों के संघीय मंत्री सीनेटर राणा सनाउल्लाह खान समेत वरिष्ठ Political नेताओं को वैश्विक स्तर पर नामित आतंकवादी हाफिज तल्हा सईद के साथ बातचीत करते देखा गया था.
तल्हा सईद लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद का बेटा है.
जिस इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने आतंकवादियों का समर्थन करने की बात स्वीकार की थी, उसी में उन्होंने कहा था, ”लश्कर बीते समय का नाम है. अब उसका अस्तित्व नहीं है.” उन्होंने यह टिप्पणी लश्कर से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने के संदर्भ में की थी.
यह भी लंबे समय से कहा जाता रहा है कि Pakistan के सैन्य मुख्यालय वाले शहर रावलपिंडी का इस्लामाबाद की नागरिक Government पर काफी प्रभाव है. हाल के दिनों में Pakistan के सेना प्रमुख सैयद आसिम मुनीर की अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मामलों में सक्रिय भूमिका को भी इसके उदाहरण के तौर पर देखा गया है.
लेख के मुताबिक, Prime Minister शहबाज शरीफ के लिए शक्तिशाली सेना प्रमुख की ओर से बोलना संभव नहीं हो सकता, खासकर ऐसे समय में जब हाल के वर्षों में कानूनी बदलावों के जरिए उनकी शक्तियों में और बढ़ोतरी हुई है.
आतंकी नेटवर्क की मौजूदगी के सवाल पर Pakistan लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय जांच और आरोपों के दायरे में रहा है.
इसका प्रमुख उदाहरण लश्कर-ए-तैयबा है, जिस पर 2008 के Mumbai आतंकी हमलों की साजिश रचने का आरोप है. इन हमलों में विदेशी नागरिकों समेत 166 लोगों की मौत हुई थी. इसके संस्थापक हाफिज सईद को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी घोषित किया हुआ है.
हाल की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि हत्या की कई कोशिशों के मद्देनजर Pakistan की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हाफिज सईद की सुरक्षा बढ़ाई है और उसे लाहौर में कड़ी सुरक्षा वाले एक ठिकाने पर रखा गया है.
ओवेन एल. सिर्स ने आईएसआई को सैन्य एजेंसी बताते हुए एक किताब में लिखा है कि वह सैन्य नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार काम करती है. उनके अनुसार, आईएसआई पर Prime Minister के बजाय सेना प्रमुख का प्रभाव रहता है.
इसी तरह जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर भी Pakistan में होने के आरोपों के कारण लंबे समय से चर्चा में रहा है. जैश-ए-मोहम्मद पर 2001 में भारतीय संसद पर हमले और 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले में शामिल होने के आरोप हैं.
लेख में 2005 में लंदन में हुए बम धमाकों और 2010 में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हमले की नाकाम कोशिश से जुड़े लोगों के Pakistan स्थित नेटवर्क से संबंधों का भी जिक्र किया गया है.
वर्ष 2003 में अल-कायदा के वरिष्ठ सदस्य खालिद शेख मोहम्मद को रावलपिंडी से पकड़ा गया था. उसे 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों की साजिश के प्रमुख लोगों में माना गया. इन हमलों में करीब 3,000 लोगों की जान गई थी.
इसके बाद 2011 में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन Pakistan के एबटाबाद में पाया गया था. उसका ठिकाना Pakistan की प्रमुख सैन्य अकादमी के नजदीक था.
लेख में मीर ऐमल कांसी का भी जिक्र किया गया है, जिसे अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के मुख्यालय के बाहर हुए हमले में शामिल होने के बाद अमेरिकी एजेंटों ने Pakistan से पकड़ा था.
इसी तरह 2002 में वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या का उदाहरण भी दिया गया है. पर्ल Pakistan में चरमपंथी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच कर रहे थे.
लेख में दावा किया गया है कि Pakistan में आतंकवादी संगठनों का इतिहास देखते हुए वहां की सरकारी व्यवस्था, खासकर सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
इस साल जून में आतंकी संगठनों से जुड़े कुछ नेताओं को Pakistan के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के भाई के अंतिम संस्कार में देखे जाने की खबरें सामने आई थीं.
social media पर सामने आई तस्वीरों में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी और Pakistan मरकजी मुस्लिम लीग के अध्यक्ष इनाम-उर-रहमान कम्बोह समेत कुछ लोग दिखाई दिए थे. लेख में कसूरी को अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का साजिशकर्ता बताया गया है, जबकि पीएमएमएल को लश्कर का Political चेहरा बताया गया है.
इन घटनाओं के मद्देनजर लेख में Pakistan के Political नेतृत्व के आतंकवाद खत्म करने के दावों पर सवाल उठाया गया है.
लेख में कहा गया है कि जब तक आतंकवादी संगठनों के प्रमुख और कमांडर Pakistan में बिना प्रभावी कार्रवाई के मौजूद रहते हैं, तब तक आतंकवाद खत्म करने के उसके दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे.
लेख के मुताबिक, आतंकवाद केवल बयानों से खत्म नहीं किया जा सकता. Pakistan के नेता अतीत की गलतियां स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन आतंकी संगठनों के प्रमुखों के खिलाफ ठोस कार्रवाई के बिना उनके दावों पर सवाल बने रहेंगे.
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एएमटी/डीकेपी
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