
बिश्केक, 1 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi ने 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में Pakistan को आईना दिखाया तो दुनिया को सभ्यता और संस्कृति की अहमियत बताई. वैश्विक मंच से India के विजन, इनिशिएटिव और जीवंत संवाद को लेकर प्रतिबद्धता का उल्लेख किया. रूसी President व्लादिमीर पुतिन, चीन के President शी जिनपिंग समेत दुनिया के 10 शीर्ष नेतृत्व के बीच Prime Minister मोदी ने वैश्विक उन्नति और प्रगति के लिए विचार रखे.
Prime Minister ने संवाद और सहयोग की मजबूत परंपरा पर बल दिया. बीते 25 वर्ष और आने वाले 25 वर्षों का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही. उन्होंने कहा, “पिछले पच्चीस वर्षों में एससीओ ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की एक मजबूत परंपरा विकसित की है. हमने मिलकर अपने लोगों की भलाई के साथ-साथ मानवता के विकास में भी बहुमूल्य योगदान दिया है. इन पच्चीस वर्षों में हमने सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है. अब आने वाले पच्चीस वर्षों में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलने का होना चाहिए.”
पीएम मोदी का एससीओ का असल मकसद और मतलब बताना भी खासा अहमियत रखता है. उन्होंने कहा, “पिछली बैठक में मैंने एससीओ को लेकर India की सोच के तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया था: एस मतलब सिक्योरिटी, सी मतलब कनेक्टिविटी और ओ मतलब ऑर्प्चुनिटी. अब समय है कि इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस आउटकम्स तक ले जाया जाए और इसकी पहली आवश्यकता है शांति और सुरक्षा.”
पीएम मोदी ने Pakistanी पीएम शहबाज शरीफ की मौजूदगी में जो कहा वो India की स्पष्ट सोच का संकेत देता है. पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि सिर्फ आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को ध्वस्त करना होगा. कहा कि आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों को समाप्त करना जरूरी है. इस मुद्दे पर सभी देशों को एक सुर में बात करनी चाहिए और दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
नशीले पदार्थों की तस्करी को पीएम मोदी ने गंभीर मसला माना. उन्होंने कहा कि ड्रग ट्रैफिकिंग केवल एक अपराध नहीं है बल्कि युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. एससीओ की ओर से किए जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एससीओ के अंतर्गत सिक्योरिटी थ्रेट (सुरक्षा संबंधी खतरे), ऑर्गेनाइज्ड क्राइम (संगठित अपराध), इंफोर्मेशन सिक्योरिटी (सूचना संबंधी सुरक्षा) और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे सेंटर्स एक सकारात्मक कदम है.
Prime Minister ने वैश्विक मंच से ‘संवाद’ और ‘कूटनीति’ को शांति के लिए अहम बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट ने यह दिखाया है कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता. उसका प्रभाव पूरे विश्व की ऊर्जा सुरक्षा, मैरीटाइम ट्रेड और सप्लाई चेन्स (आपूर्ति श्रृंखला) पर पड़ता है. इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है इसलिए India का आह्वान रहा है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं, डायलॉग और डिप्लोमेसी से ही संभव है.
पीएम मोदी ने साझा विकास की बात करते हुए संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर जोर दिया. वैश्विक मंच से पीएम ने कहा कि India उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है, जो मार्केट्स (बाजार) को जोड़ते हैं, व्यापार को सुगम बनाते हैं, और विकास के नए रास्ते खोलते हैं. किन्तु इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी अत्यंत आवश्यक है. यही एससीओ चार्टर की भी मूल भावना है.
India के Prime Minister ने एससीओ की सबसे बड़ी ‘पूंजी’ का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि एससीओ के सहयोग का लाभ सीधे हमारे लोगों तक पहुंचा जरूरी है. हमारी सबसे बड़ी पूंजी हमारे लोगों के बीच आपसी संबंध हैं. India के लिए एससीओ महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है. एससीओ के अगले पच्चीस वर्षों में पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट को हमारे सहयोग के केन्द्र में रखना चाहिए.
युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने की वकालत की. पीएम मोदी के अनुसार, सफलता की वास्तविक कसौटी हमारे प्रयासों से युवाओं को मिलने वाले अवसर, हमारे उद्यमियों के लिए खुलने वाले नए बाजार, हमारे किसानों को प्रौद्योगिकी का मिलने वाला लाभ, और हमारे नागरिकों का बेहतर होता जीवन होना चाहिए.
वैश्विक मंच से पीएम मोदी ने सहयोग को ‘गवर्नमेंट ड्रिवन’ नहीं, बल्कि ‘पीपुल ड्रिवन’ बनाने पर जोर दिया. किर्गिस्तान की अध्यक्षता के अंतर्गत एससीओ में यूथ एंगेजमेंट पर बल दिए जाने की प्रशंसा करते हुए पीएम ने बताया कि India ने एससीओ में स्टार्ट-अप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्कलेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसे इनिशिएटिव लिए हैं. पिछले वर्ष India में हुए एससीओ सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इसका पहला सत्र इस वर्ष India में आयोजित होगा. पीएम के मुताबिक सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी से यह फोरम एससीओ में जीवंत संवाद का सशक्त मंच बनेगा.
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कएस केआर/
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