
New Delhi, 15 अक्टूबर . केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Thursday को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में हिस्सा लेने के लिए पहुंचीं.
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वह जी20 और जी7 देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक गवर्नरों (एफएमसीबीजी) की बैठकों में भी भाग लेंगी. इसके अलावा, बैंकॉक में विभिन्न देशों और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगी.
बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर पहुंचने पर थाईलैंड में India के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने उनका स्वागत किया.
थाईलैंड Government के वित्त मंत्रालय के ट्रेजरी विभाग के उप महानिदेशक रुएचा वराटोर्न ने भी वित्त मंत्री का स्वागत किया.
इस यात्रा के दौरान वित्त मंत्री वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों से संबंधित कई बहुपक्षीय बैठकों और चर्चाओं में भाग लेंगी. इनमें वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी.
इन बैठकों से वैश्विक अर्थव्यवस्था की संभावनाओं, विकास संबंधी प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग पर विभिन्न देशों के साथ विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा.
निर्मला सीतारमण की थाईलैंड के उप-Prime Minister एवं वित्त मंत्री एकनिति नितिथानप्रपास के साथ भी बैठक प्रस्तावित है. इसके अलावा वह स्विट्जरलैंड, जापान, लक्जमबर्ग, भूटान और कुराकाओ के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी.
वित्त मंत्री अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा तथा जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के गवर्नर से भी मुलाकात करेंगी.
मंत्रिस्तरीय बैठकों के अलावा सीतारमण वैश्विक नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों से जुड़े कई कार्यक्रमों और चर्चाओं में भी भाग लेंगी.
इनमें India की विकास संभावनाओं, व्यापारिक मजबूती, वैश्विक पहुंच, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार, भारत-आसियान संबंधों और ‘विकसित India 2047’ जैसे विषयों पर अटलांटिक काउंसिल द्वारा आयोजित फायरसाइड चैट शामिल है.
इसके अलावा, वह जर्मनी द्वारा आयोजित ‘वर्किंग टुगेदर टू मेक सिटीज इन्वेस्टेबल – मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल फॉर अर्बन एंड वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर’ विषयक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी.
इन बैठकों और कार्यक्रमों के माध्यम से India के आर्थिक प्रदर्शन, सुधार एजेंडा और निवेश अवसरों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा. साथ ही वैश्विक आर्थिक महत्व के मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संवाद और सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलेगी.
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डीबीपी
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