
जम्मू, 7 सितंबर . जम्मू के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ Police (आईजीपी) तेजिंदर सिंह ने Monday को जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सुरक्षा और Policeिंग इंतजामों का जायजा लिया.
जम्मू Police जोनल हेडक्वार्टर ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि आईजीपी जम्मू जोन ने डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ Police (जम्मू-सांबा-कठुआ रेंज) श्रीधर पाटिल के साथ सांबा का दौरा किया और सुरक्षा व Policeिंग इंतजामों की समीक्षा की.
उन्होंने (आईजीपी जम्मू तेजिंदर सिंह) प्रिवेंटिव Policeिंग (अपराध रोकने वाली Policeिंग), बॉर्डर पर बेहतर निगरानी, असरदार तालमेल और प्रोफेशनल Policeिंग पर जोर दिया.
31 अगस्त को आईजीपी जम्मू जोन का पद संभालने के बाद से, तेजिंदर सिंह Police और जनता के बीच अच्छे संबंध सुनिश्चित करने के लिए रोड मार्च कर रहे हैं.
कानून-व्यवस्था और आतंकवाद-विरोधी अभियानों पर ध्यान देने के साथ-साथ, जम्मू डिवीजन में जम्मू-कश्मीर Police के लिए एक बड़ी चिंता का विषय सीमा-पार तस्करी है, जो 740 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए होती है. जब तस्करी का सामान अंदरूनी इलाकों तक पहुंच जाता है, तो यह स्थानीय Police के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि Pakistan में बैठे आतंकी आका जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों को बनाए रखने के लिए तस्करी का इस्तेमाल करते रहे हैं.
जम्मू डिवीजन में कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सुरक्षा बलों के सामने आने वाली चुनौतियों में बदलती आतंकी गतिविधियां, मुश्किल भौगोलिक स्थिति और सीमा-पार तस्करी जैसी जटिल समस्याएं शामिल हैं.
आतंकी गतिविधियां और सुरक्षा के लिए लक्षित खतरे तेजी से जम्मू डिवीजन के दूर-दराज, पहाड़ी इलाकों—जैसे पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला और चिनाब नदी घाटी क्षेत्र—की ओर फैल रहे हैं.
मुश्किल इलाकों में घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र शामिल हैं, जो दुश्मन ताकतों को प्राकृतिक आड़ देते हैं और उग्रवाद-विरोधी अभियानों को बहुत चुनौतीपूर्ण बना देते हैं.
इंटरनेशनल बॉर्डर (आईबी) और लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के पार घुसपैठ की लगातार कोशिशों और हथियारों, गोला-बारूद व नशीले पदार्थों को ड्रोन से गिराए जाने की घटनाओं के कारण ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है.
स्थानीय ड्रग तस्करी गिरोहों से निPatna एक लगातार बनी रहने वाली ऑपरेशनल चुनौती है.
Police कर्मियों को एक ही समय में आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, खुफिया जानकारी जुटाने, बिखरी हुई या दूर-दराज की अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा और रोजमर्रा के कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे कामों को संभालना पड़ता है.
तेजी से हो रहे शहरी विकास और बड़े शहरी केंद्रों में सीमित सड़क नेटवर्क के कारण ट्रैफिक को ठीक से कंट्रोल करने और किसी घटना पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में लगातार मुश्किलें आती हैं.
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एमएस/
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