आंदोलन में शामिल छात्रों का दमन कर रही राज्य सरकार, माफी मांगें हेमंत सोरेन: बाबूलाल मरांडी

रांची, 23 अगस्त . Jharkhand के पूर्व Chief Minister और राज्य की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती विवाद को लेकर Chief Minister हेमंत सोरेन और सत्तारूढ़ Jharkhand मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर तीखा जुबानी हमला बोला है.

मरांडी ने आरोप लगाया है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की लोकतांत्रिक और आंदोलनात्मक विरासत को संभालने का दावा करने वाली मौजूदा Government आज अपनी मांगें उठा रहे युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने Sunday को कहा कि जिस संघर्ष और जनआंदोलन के बल पर झामुमो की पहचान बनी, आज उसी संघर्ष की परंपरा को ताक पर रखकर आंदोलनकारी छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि Jharkhand मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता और Government में बैठे लोग आज सड़कों पर आंदोलन कर रहे पीड़ित छात्रों में केवल अराजकता देख रहे हैं, जो उनके नैतिक पतन को दर्शाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शिबू सोरेन के लोकतांत्रिक संघर्ष की विरासत अब केवल युवाओं को डराने, धमकाने और उनकी न्यायसंगत आवाज को कुचलने तक सीमित हो गई है.

मरांडी ने Chief Minister पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी नैतिकता और गुरुजी के संघर्षों के प्रति सम्मान बचा है, तो उन्हें सत्ता के अहंकार को त्यागकर हताश और पीड़ित अभ्यर्थियों के बीच जाना चाहिए और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए. मरांडी ने विधानसभा और Chief Minister आवास के घेराव से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए Police प्रशासन की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए.

उन्होंने Chief Minister से सीधा जवाब मांगते हुए कहा कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग करने और उनके प्रतीक चिह्नों को छीनने का आदेश किस प्रशासनिक अधिकारी ने दिया था. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि Chief Minister इस अमानवीय घटनाक्रम पर राज्य के Police महानिदेशक से जवाब-तलब नहीं करते हैं, तो Jharkhand की जनता यही समझेगी कि छात्रों के खिलाफ यह पूरी कार्रवाई सीधे Chief Minister के इशारे पर की गई है. मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने वाला कोई भी शासक शासन करने का नैतिक अधिकार खो देता है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष ने राज्य की न्यायपालिका से भी गुहार लगाई है. उन्होंने अपील की है कि उच्च न्यायालय इस पूरी घटना का स्वतः संज्ञान ले, ताकि भविष्य में इतिहास यह न लिखे कि जब शासन तंत्र निरंकुश और असंवैधानिक हो रहा था, तब न्याय का मंदिर मूकदर्शक बना रहा.

एसएनसी/एएस