
गांधीनदर, 1 अक्टूबर . Enforcement Directorate (ईडी) के Ahmedabad जोनल ऑफिस ने इलेक्ट्रोथर्म इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) के मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत 43.65 करोड़ रुपए की चल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है.
ईडी की ओर से जब्त की गई संपत्तियों में यस बैंक में ईआईएल के दो बैंक खातों में मौजूद 25.08 करोड़ रुपए की राशि और प्रमोटरों के पास मौजूद ईआईएल के 13,57,775 शेयर शामिल हैं, जिनकी कीमत 18.57 करोड़ रुपए है.
ईडी की जांच सीबीआई, बीएसएंडएफबी, Mumbai द्वारा आईपीसी, 1860 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत ईआईएल और उसके निदेशकों के खिलाफ दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की गई थी.
यह First Information Report बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप था कि आरोपियों ने 2007 से 2013 के दौरान बैंक से ली गई क्रेडिट सुविधाओं से मिले फंड को दूसरी जगह इस्तेमाल किया और हड़प लिया. ईआईएल पर कुल बकाया राशि 631.97 करोड़ रुपए थी और बाद में इस खाते को 550 करोड़ रुपए में एडेलवाइस एआरसी को सौंप दिया गया, जिससे बैंक को 81.97 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.
जांच से पता चला है कि बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कंपनी को विस्तार के लिए दिए गए लोन की राशि मंजूर किए गए मकसद के उलट, मिलते ही मौजूदा देनदारियों को चुकाने में इस्तेमाल कर ली गई. इसके अलावा, ईआईएल ने कई संस्थाओं को फंड ट्रांसफर किया, जिसे मिलने के तुरंत बाद या तो सीधे या दूसरी संस्थाओं के जरिए घुमा-फिराकर राउंड-सम रकम में कैश के तौर पर निकाल लिया गया. 2007 से 2013 के दौरान ईआईएल के बैंक खातों से करोड़ों रुपए कैश निकाले गए.
इससे पहले जनवरी 2025 में पीएमएलए, 2002 के तहत कंपनी और उसके निदेशक/प्रमोटरों के ठिकानों पर तलाशी ली गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 38.32 करोड़ रुपS की संपत्ति जब्त/फ्रीज की गई थी. पीएमएलए के तहत सक्षम निर्णायक प्राधिकरण ने भी इसकी पुष्टि की है. इस अटैचमेंट के साथ इस मामले में कुल जब्ती/फ्रीजिंग/अटैचमेंट की राशि 81.97 करोड़ रुपए हो गई है. वहीं, ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है.
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डीके/
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