
इटानगर, 14 अक्टूबर . अरुणाचल प्रदेश के Chief Minister पेमा खांडू ने Wednesday को कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर स्थित 123 गांवों से जुड़े अंतरराज्यीय सीमा विवाद काफी हद तक सुलझ गए हैं.
खांडू ने कहा कि क्षेत्रीय समितियों के हालिया संयुक्त क्षेत्र दौरों के बाद पापुम पारे जिले के 32 विवादित क्षेत्रों में से 31 का निपटारा हो गया है.
असम और अरुणाचल प्रदेश 804 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा साझा करते हैं, और दोनों राज्य अपनी सीमा पर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने के प्रयासों में लगे हुए हैं.
Chief Minister ने यह भी कहा कि चकमा मुद्दे सहित अन्य लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने के प्रयास प्रगति पर हैं.
उन्होंने कहा कि लोगों को उचित समय पर घटनाक्रमों से अवगत कराया जाएगा.
खांडू ने Wednesday को नाहरलागुन के पास ताराजुली स्थित गालो हेरिटेज सेंटर में डोनी पोलो बहुउद्देशीय हॉल का उद्घाटन किया और इसे सामुदायिक भागीदारी और सांस्कृतिक संकल्प का प्रतीक बताया.
Chief Minister ने कहा कि यह परियोजना सरकारी वित्त पोषित इमारत से कहीं अधिक है.
नाहरलागुन स्थित मोपिन मैदान गालो समुदाय द्वारा स्वेच्छा से राज्य के पहले मेडिकल कॉलेज, टोमो रिबा इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (टीआरआईएचएमएस) के निर्माण हेतु सौंप दिया गया था.
समाज से सभी कार्यों को समान महत्व देने का आग्रह करते हुए Chief Minister खांडू ने कहा कि विकसित देश श्रम को उच्च सम्मान देते हैं और उन्होंने अरुणाचल प्रदेश को भी ऐसी ही कार्य संस्कृति विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया.
उन्होंने स्थानीय युवाओं को निर्माण, विद्युत और प्लंबिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का आह्वान किया, ताकि राज्य को बाहरी कुशल श्रमिकों पर कम निर्भर रहना पड़े.
उन्होंने हैदराबाद के राष्ट्रीय कौशल केंद्र में भेजे गए 50 युवाओं के एक समूह का उदाहरण दिया, जिन्होंने बाद में पासीघाट में एक परियोजना को 10 लाख रुपए में पूरा किया, जबकि बाहरी टीम ने इसके लिए 18 लाख रुपए का प्रस्ताव दिया था.
Chief Minister ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय संदर्भ में अरुणाचल प्रदेश की आदिवासी आबादी कम है और कहा कि भाषा और परंपरा के लुप्त होने से पहचान खतरे में पड़ जाएगी.
उन्होंने कहा कि Government केवल नीति के माध्यम से ही सहायता कर सकती है, लेकिन समुदायों को स्वयं अपनी विरासत को संरक्षित करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना होगा.
–
एमएस/
Skip to content