असम सरकार ने वन विभाग कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन तबादला पोर्टल किया शुरू

गुवाहाटी, 23 अक्टूबर . असम के Chief Minister हिमंता बिस्व सरमा ने Friday को वन विभाग के कर्मचारियों के लिए एक ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल लॉन्च किया. इस नई व्यवस्था के तहत 2,137 कर्मचारियों के तबादले रैंडमाइजेशन सिस्टम के जरिए किए जाएंगे, जिससे स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके.

कर्मचारी स्थानांतरण रैंडमाइजेशन सिस्टम को दिसपुर स्थित लोक सेवा भवन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया.

पोर्टल के पहले चरण में डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, फॉरेस्ट गार्ड, फिक्स्ड-पे कर्मचारी और गेम वॉचर शामिल हैं, जिन्होंने अपने मौजूदा कार्यस्थल पर तीन वर्ष पूरे कर लिए हैं.

पोर्टल लॉन्च होने के तुरंत बाद संबंधित कर्मचारियों के तबादला आदेश भी जारी कर दिए गए.

Government ने कुछ कर्मचारियों को इस प्रक्रिया से छूट दी है. इनमें 58 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारी, ऐसे कर्मचारी जिनके निकट परिजनों को गंभीर बीमारी है, गर्भावस्था से संबंधित मामलों वाले कर्मचारी, जिन कर्मचारियों ने वर्तमान पदस्थापन पर तीन वर्ष पूरे नहीं किए हैं, विशेष वन्यजीव विशेषज्ञ कर्मचारी, निलंबित अधिकारी और कर्मचारी (नियमों के अधीन) शामिल हैं.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Chief Minister सरमा ने कहा कि Government भर्ती प्रक्रिया की तरह स्थानांतरण प्रक्रिया में भी पारदर्शिता ला रही है.

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में ‘स्वागत सतिर्थ’ पोर्टल के माध्यम से हजारों कर्मचारियों की पारस्परिक तबादला मांगों का समाधान किया गया है. उन्होंने अन्य विभागों से भी तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं अपनाने का आग्रह किया.

Chief Minister ने वन विभाग को वन भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए प्रयास तेज करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने कहा कि उपग्रह चित्रों (सैटेलाइट इमेजरी) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से शुरुआती स्तर पर ही अतिक्रमण की पहचान की जानी चाहिए.

उन्होंने बताया कि हाल ही में 600 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है और ऐसी जमीनों पर तुरंत वनीकरण करने को कहा.

सरमा ने प्रभागीय वन अधिकारियों को निर्देश दिया कि अतिक्रमण बड़े स्तर पर फैलने के बाद Police के पास जाने के बजाय शुरुआती चरण में ही कार्रवाई करें.

Chief Minister ने वन विभाग से मिलने वाली रॉयल्टी और राजस्व को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से यह राशि लगभग 700 करोड़ रुपए के आसपास स्थिर बनी हुई है.

उन्होंने पात्र पत्थर खदानों और रेत खनन स्थलों को वैध बनाने की वकालत की, ताकि अवैध खनन पर रोक लग सके, सरकारी राजस्व बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों.

सीएम सरमा ने कहा कि असम में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का प्रस्ताव है. ऐसे में कानूनी रूप से स्वीकृत निर्माण सामग्री के स्रोत मांग को पूरा करने में मदद करेंगे और अवैध कारोबार पर भी रोक लगेगी.

इस कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री जयंत मल्लबरुआह, सांसद देबाशीष शर्मा तथा कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मौजूद रहे.

–

एएमटी/डीकेपी