असम उपचुनाव जीतने के बाद भाजपा का अजमल पर बड़ा निशाना, देवाशीष शर्मा बोले- लोगों ने सांप्रदायिक राजनीति को नकारा

गुवाहाटी, 10 अक्टूबर . भाजपा नेता देवाशीष शर्मा ने दावा किया कि एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने चुनाव प्रचार के दौरान सांप्रदायिक मुद्दों के आधार पर वोट मांगने की कोशिश की. उनका कहना है कि मतदाताओं ने इस तरीके को स्वीकार नहीं किया और इसका असर चुनाव नतीजों पर पड़ा. बता दें कि देवाशीष शर्मा ने नागांव Lok Sabha उपचुनाव में जीत हासिल की है.

Saturday को पत्रकारों से बातचीत में शर्मा ने कहा कि वह यह नहीं कह सकते कि अजमल के प्रचार ने सीधे तौर पर उन्हें फायदा पहुंचाया या नहीं, क्योंकि अजमल चुनाव में उनके प्रतिद्वंद्वी थे.

हालांकि, उन्होंने कहा कि अजमल के प्रचार के तरीके ने मतदाताओं के फैसले को प्रभावित किया हो सकता है.

शर्मा ने कहा, “मुझे नहीं पता कि अजमल ने मेरी मदद की या नहीं, क्योंकि वह मेरे खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन उनके चुनाव प्रचार का तरीका मेरे पक्ष में गया, क्योंकि उन्होंने सांप्रदायिक आधार पर वोट मांगने की कोशिश की, जिसे लोगों ने स्वीकार नहीं किया.”

उन्होंने यह भी दावा किया कि भविष्य में एआईयूडीएफ की Political स्थिति कमजोर होगी और एक दिन यह पार्टी भी कांग्रेस की तरह खत्म हो जाएगी.

ताजा चुनावी आंकड़ों के अनुसार, देवाशीष शर्मा ने नागांव Lok Sabha उपचुनाव में 1,57,804 वोटों के अंतर से बदरुद्दीन अजमल को हराया.

शर्मा को 6,91,804 वोट मिले, जबकि अजमल को 5,34,000 वोट प्राप्त हुए. मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या वाले इस Lok Sabha क्षेत्र में भाजपा की यह जीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

अल्पसंख्यक मतदाताओं का समर्थन मिलने के सवाल पर शर्मा ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से लोगों के बीच लगातार सक्रिय रहने का उन्हें लाभ मिला.

उन्होंने कहा कि कैंसर मरीजों और कैंसर से उबर चुके लोगों के साथ उनके जुड़ाव से लोगों के साथ व्यक्तिगत संबंध बने, जिसका सकारात्मक असर चुनाव में देखने को मिला.

शर्मा ने अपनी जीत का श्रेय भाजपा की नीतियों और असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा के मार्गदर्शन को भी दिया.

इस आरोप पर कि उन्होंने मोरीगांव और नागांव के उपायुक्त (डीसी) रहते हुए Political करियर की तैयारी की थी, शर्मा ने कहा कि सरकारी अधिकारियों का काम राज्य Government के साथ मिलकर उसकी योजनाओं को लागू करना होता है.

उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी, हालांकि कॉलेज के दिनों से उनकी राजनीति में रुचि रही है और उन्होंने राजनीति विज्ञान की पढ़ाई भी की थी.

शर्मा ने कहा, “कुछ बातें किस्मत में लिखी होती हैं और शायद यही मेरी नियति थी.”

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एएमटी/डीकेपी