
New Delhi, 6 नवंबर . दिल्ली हाईकोर्ट ने अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को सात दिन की कस्टडी पैरोल दी है. अदालत ने यह राहत उनकी पत्नी की गंभीर बीमारी को देखते हुए दी है. सिद्दीकी की पत्नी स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर से पीड़ित हैं और 10 नवंबर को उनकी कीमोथेरेपी का अगला सत्र होना है.
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. सिद्दीकी ने पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए एक सप्ताह की अंतरिम जमानत या कस्टडी पैरोल देने की मांग की थी. हालांकि, Enforcement Directorate (ईडी) ने उनकी रिहाई का विरोध किया. जांच एजेंसी ने अदालत में दलील दी कि सिद्दीकी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं. इसके बावजूद अदालत ने उनकी पारिवारिक परिस्थितियों और पत्नी की बीमारी को ध्यान में रखते हुए सात दिन की कस्टडी पैरोल मंजूर कर दी.
कस्टडी पैरोल के दौरान कैदी को Police सुरक्षा में निर्धारित स्थान पर ले जाया जाता है. इस दौरान वह Police की निगरानी में रहता है और उसे निर्धारित शर्तों का पालन करना होता है.
बता दें कि जवाद अहमद सिद्दीकी अल फलाह यूनिवर्सिटी ग्रुप के चेयरमैन हैं. लाल किला ब्लास्ट मामले के बाद यह ग्रुप सुर्खियों में आया था.
इस बीच, लाल किला ब्लास्ट मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट की विशेष एनआईए अदालत ने सभी 11 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर तक बढ़ा दी है. आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया था. अदालत अब मामले में आरोप तय करने के संबंध में अगली सुनवाई 21 नवंबर को करेगी.
इससे पहले एनआईए ने इस मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ करीब 75 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. जांच एजेंसी के मुताबिक, धमाके का मुख्य साजिशकर्ता उमर उन नबी था, जो आत्मघाती हमलावर था और धमाके में मारा गया था. उसका नाम भी चार्जशीट में शामिल किया गया है.
एनआईए की चार्जशीट में उमर उन नबी के अलावा जमीर अहमद अहंगर, तुफैल अहमद भट्ट, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद, जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, डॉ. आदिल अहमद, यासिर अहमद डार, डॉ. मुजम्मिल शकील, आमिर राशिद अली, अहमद डार और शोएब के नाम शामिल हैं.
गौरतलब है कि 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए इस धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 24 से अधिक लोग घायल हुए थे. मामले की जांच एनआईए कर रही है.
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डीएससी
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