अमेरिकी सेना के एआई सिस्टम पर उठे सवाल, तीन सीनियर सीनेटरों ने की जांच की मांग

वाशिंगटन, 22 सितंबर . अमेरिकी सेना और खुफिया ऑपरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के फेल होने की खबरों के बाद अमेरिका में हड़कंप मच गया है. तीन सीनियर अमेरिकी सीनेटरों ने इन मामलों की जांच की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि गलत डेटा और एआई से बनी झूठी जानकारी से जानलेवा गलतियां हो सकती हैं.

सीनेटर मार्क वार्नर, जैक रीड और क्रिस कून्स ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जे क्लेटन से कहा है कि वे इंस्पेक्टर जनरल को इन घटनाओं की जांच के लिए पूरी छूट दें.

मार्क वार्नर सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी में सीनियर डेमोक्रेट हैं. जैक रीड सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के रैंकिंग मेंबर हैं, जबकि क्रिस कून्स सीनेट की रक्षा सबकमेटी में डेमोक्रेट्स का नेतृत्व करते हैं.

सीनेटरों ने पत्र में सार्वजनिक रिपोर्टों का हवाला दिया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के मिनाब में अमेरिकी हमले के दौरान एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने पुराने भौगोलिक डेटा का इस्तेमाल किया था.

दूसरा मामला स्पेशल ऑपरेशंस कमांड पैसिफिक से जुड़ा है, जहां एआई से बनी गलत जानकारी को अमेरिकी खुफिया जानकारी में शामिल कर दिया गया, जिसके कारण एक सैन्य अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा.

सीनेटरों ने मिनाब हमले या रोके गए मिशन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है. उनके द्वारा जारी की गई सामग्री में इन खामियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

सीनेटरों ने पत्र में लिखा, “हाल की घटनाओं ने हमें चिंतित कर दिया है. सार्वजनिक रिपोर्ट है कि मिनाब, ईरान में हमले में एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने पुराने डेटा पर भरोसा किया और एक रिपोर्ट है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड पैसिफिक द्वारा फैलाई गई खुफिया जानकारी में एआई की गलत जानकारी के कारण एक सैन्य अभियान रोकना पड़ा. इससे लगता है कि आपकी निगरानी वाली एजेंसियों ने एआई की क्षमता को तेजी से अपनाने और प्रयोग को सही निगरानी से ज्यादा महत्व दिया है.”

उन्होंने चेतावनी दी कि टारगेटिंग और इंटेलिजेंस सिस्टम में गलतियों से ऑपरेशन फेल हो सकते हैं और अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बीच अमेरिकी खुफिया जानकारी पर भरोसा कमजोर हो सकता है.

सीनेटरों ने लिखा, “सार्वजनिक रिपोर्ट है कि एआई टारगेटिंग प्लेटफॉर्म ने बार-बार गलत जानकारी दी है, जो पुराने डेटा या पूरी तरह से गलत जानकारी पर आधारित है, इससे गंभीर ऑपरेशनल गलती का खतरा है.”

उन्होंने कहा कि ऐसी विफलताओं से ‘अमेरिकी खुफिया और खुफिया जानकारी पर आधारित सैन्य कार्रवाई की सटीकता और विश्वसनीयता’ पर भरोसा कम हो सकता है.

सीनेटरों ने इंस्पेक्टर जनरल से तुरंत जांच और नतीजों को सार्वजनिक करने की मांग की है. उन्होंने पेंटागन पर एक बड़ी अमेरिकी एआई कंपनी पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया. उनके अनुसार, यह कंपनी अपनी टेक्नोलॉजी को पूरी तरह से ऑटोनॉमस ऑपरेशन में इस्तेमाल करने की इजाजत देने से बच रही थी. हालांकि बयान में कंपनी का नाम नहीं बताया गया.

सीनेटरों ने लिखा, “ये संभावित गलतियां, इस पृष्ठभूमि में कि रक्षा विभाग ने एक प्रमुख अमेरिकी एआई कंपनी को परेशान किया क्योंकि वह अपने प्रोडक्ट को पूरी तरह से ऑटोनॉमस हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देना चाहती थी, इनकी इंस्पेक्टर जनरल द्वारा तुरंत जांच होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि एआई खुफिया विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इस पर सख्त प्रोफेशनल मानकों और मानवीय निगरानी की जरूरत है.

सीनेटरों ने लिखा, “एआई का एनालिटिक और अन्य क्षेत्रों में सही इस्तेमाल है, मजबूत मानकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी खुफिया प्रोडक्ट में एआई से बनी गलतियां न हों, खासकर जब ऐसी खुफिया जानकारी परमाणु हथियार वाले दुश्मन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का कारण बन सकती है.”

उन्होंने Government द्वारा नेशनल सिक्योरिटी मेमोरेंडम 25 को रद्द करने और रक्षा विभाग की एक रणनीति की भी आलोचना की, जो उनके अनुसार, निगरानी की जरूरतों को तेजी से एआई अपनाने में बाधा मानती है.

उन्होंने कहा, “social media पर ‘ मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स’ वाला तरीका चल सकता है, लेकिन इससे गंभीर ऑपरेशनल गलतियां हो सकती हैं.”

सीनेटरों ने जांचकर्ताओं से इन दो घटनाओं की जांच करने और यह पता लगाने को कहा है कि क्या एआई टारगेटिंग से जुड़ी अन्य बड़ी विफलताएं भी हुई हैं जो सार्वजनिक नहीं हुई हैं.

अमेरिकी सेना निगरानी की जानकारी को प्रोसेस करने, पैटर्न पहचानने और ऑपरेशनल फैसलों में मदद के लिए तेजी से एआई का इस्तेमाल कर रही है. इससे डेटा की सटीकता, जवाबदेही और मानवीय नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर जब एआई से बनी खुफिया जानकारी घातक बल के इस्तेमाल का कारण बन सकती है.

इस मुद्दे का असर India सहित अमेरिका के रक्षा सहयोगियों पर भी पड़ेगा, क्योंकि सेनाएं खुफिया और नई तकनीकों में सहयोग बढ़ा रही हैं.

एएस