अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत से भारत को मिल सकता है फायदा, कच्चे तेल और डॉलर पर रह सकती है नजर

New Delhi, 4 नवंबर . अमेरिका के मिडटर्म चुनाव (मध्यावधि चुनाव) में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है. विश्लेषकों का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के बेहतर प्रदर्शन से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी व्यापार नीतियों, प्रमुख उद्योगों के नियामकीय ढांचे और वैश्विक भू-Political परिदृश्य पर असर पड़ सकता है. इसका प्रभाव India सहित दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी समीकरणों में बदलाव की संभावना के चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट दर्ज की गई है. बाजार इस संभावना को भी ध्यान में रख रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत स्थिति में आने से अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान से जुड़े तनाव को कम करने का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है. हालांकि डेमोक्रेट्स की जीत के बाद कच्चे तेल की कीमतों में Wednesday को गिरावट दर्ज की गई. खबर लिखे जाने तक (दोपहर 1.54 बजे के करीब) डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 95.82 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया, तो वहीं ब्रेंट क्रूड 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 103.2 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करती नजर आई.

विशेषज्ञों का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत का India के लिए सबसे बड़ा लाभ कम कच्चे तेल की कीमतों के रूप में सामने आ सकता है. कम तेल कीमतों से आयात बिल घटेगा, रुपए पर दबाव कम होगा और मुद्रास्फीति नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही कमजोर अमेरिकी डॉलर और नरम ट्रेजरी यील्ड विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ा सकते हैं, जिससे भारतीय बाजारों में निवेश प्रवाह को समर्थन मिल सकता है.

हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि India और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर तत्काल कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने की संभावना कम है. चुनाव परिणामों के बावजूद अमेरिकी President के पास विदेश नीति और व्यापार से जुड़े कई मामलों में व्यापक कार्यकारी अधिकार बने रहेंगे.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा और कुछ प्रौद्योगिकी कंपनियों पर अल्पकालिक दबाव बन सकता है, क्योंकि डेमोक्रेटिक प्रभाव बढ़ने की स्थिति में सख्त नियामकीय निगरानी और भविष्य में करों में वृद्धि की आशंका बढ़ सकती है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने से ऊर्जा कंपनियों की आय पर भी असर पड़ सकता है.

विश्लेषकों का यह भी मानना है कि डेमोक्रेटिक नियंत्रण वाली कांग्रेस President ट्रंप की शुल्क (टैरिफ) नीतियों पर अधिक निगरानी रख सकती है और कुछ मामलों में विधायी चुनौतियां पेश कर सकती है. हालांकि टैरिफ व्यवस्था में तत्काल बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, क्योंकि व्यापार नीति के कई महत्वपूर्ण अधिकार President के पास ही बने रहते हैं.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र को लेकर विशेषज्ञ अभी भी सकारात्मक नजरिया रखते हैं. उनका मानना है कि डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई निवेश आने वाले समय में भी जारी रहेंगे. हालांकि Governmentों की भूमिका इन क्षेत्रों में नियमन और बुनियादी ढांचा विकास के मामलों में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत का आकार कितना बड़ा होता है, जिसे 2028 के अमेरिकी President चुनाव से पहले बदलते Political रुझानों के शुरुआती संकेत के रूप में भी देखा जाएगा. India के लिए फिलहाल कम तेल कीमतें, कमजोर डॉलर और बेहतर वैश्विक निवेश वातावरण सबसे महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक माने जा रहे हैं.

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डीबीपी