
निशियो, 2 अक्टूबर . भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने कहा कि ओलंपियन और पूर्व एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट अमित पंघाल उनके बड़े भाई जैसे हैं. उन्होंने बताया कि अमित की उपलब्धियों से उन्हें हमेशा प्रेरणा मिलती रही है. अंकुश ने कहा कि उनका सपना भी एशियन गेम्स 2018 में अमित पंघाल की तरह गोल्ड मेडल जीतना था, और एशियन गेम्स 2026 में वह उसी लक्ष्य को हासिल करना चाहते थे.
अंकुश ने 80 किग्रा वर्ग के गोल्ड मेडल मुकाबले में साउथ कोरिया के किम मिनसोंग को 4-0 से हराया. फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने यह जीत हासिल की. 2018 जकार्ता खेलों में अमित के गोल्ड मेडल जीतने के बाद, गोल्ड मेडल जीतने वाले वह पहले भारतीय पुरुष बॉक्सर बने.
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अंकुश ने कहा, “हां, वह (अमित) मेरे बड़े भाई हैं. मैं उनसे बात करता था. मैं अब भी उनसे बात करता हूं. 2018 में अमित पंघाल ने गोल्ड जीता था, इस बार मैं भी वैसा ही करना चाहता था. वह मेरे सगे भाई जैसे हैं.” अंकुश सेमीफाइनल में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन फजलिद्दीन एर्किनबोएव को 4-1 से हराकर फाइनल में पहुंचे थे. फाइनल में अंकुश के प्रतिद्वंद्वी किम को इस साल की शुरुआत में एशियाई चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में एर्किनबोएव से हार का सामना करना पड़ा था, जहां कोरियाई खिलाड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.
वर्ल्ड चैंपियन के खिलाफ जीत हासिल करने के बावजूद, अंकुश का कहना है कि फाइनल में उतरते समय उन्हें जरा भी अति-आत्मविश्वास नहीं था. उन्होंने कहा, “नहीं, मुझमें अति-आत्मविश्वास नहीं था. मगर मुझे भरोसा था कि मैं फाइनल जीतूंगा. मुझे कभी ऐसा अति-आत्मविश्वास नहीं हुआ कि मैं हर किसी को हरा दूंगा. मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था.” उन्होंने बताया कि उन्हें दिन में पहले लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और परवीन हुड्डा (65 किग्रा) की अपनी-अपनी कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीतने से भी प्रेरणा मिली. उन्होंने कहा, “हां, मुझे लगा कि देश ने दो गोल्ड मेडल जीत लिए हैं और अब मुझे तीसरा मेडल लाना है.”
अंकुश ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी गोल्ड मेडल जीता था. 21 साल के अंकुश ने इस साल को अपने लिए सबसे अच्छा बताया, क्योंकि अब उनके पास दो बड़े गोल्ड मेडल हैं. उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में यह मेरे लिए सबसे अच्छा साल रहा है. पहले मुझे सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडल मिलते थे, लेकिन इस बार मेरे पास दो गोल्ड मेडल हैं. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. मेरी ट्रेनिंग अच्छी चल रही थी. मैंने कैंप में अच्छी ट्रेनिंग की. मेरी प्रैक्टिस बेहतर हो रही है.”
अंकुश ने कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर शुरुआत की थी क्योंकि उनके पिता भी कबड्डी खेलते थे, लेकिन बाद में शुरुआती दिनों में ही उन्होंने बॉक्सिंग अपना ली. उन्होंने बताया, “जब मैं स्कूल में था, तो 2-3 साल तक कबड्डी खेलता था. मैं किसी ऐसे खेल में जाना चाहता था जिसमें अकेले खेलना हो. मैंने 10 साल पहले बॉक्सिंग शुरू की. 2018 में मुझे स्कूल नेशनल में गोल्ड मेडल मिला. उसके बाद मैंने बॉक्सिंग पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया.”
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एसएम/एबीएम
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