
वाशिंगटन, 29 अगस्त . अफगानिस्तान पर कूटनीतिक पकड़ कम होते देख Pakistan पुराने ढर्रे पर लौटने की कोशिशों में जुट गया है. मुल्क ने चुनिंदा आतंकवादी समूहों को बर्दाश्त करने की रणनीति तैयार कर ली है. एक रिपोर्ट इसका संकेत देती है.
रिपोर्ट के मुताबिक आतंकवादी समूह ‘इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस’ (आई ) का नेटवर्क खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में अभी भी सक्रिय है. इनमें से कुछ समूह कथित तौर पर Pakistanी सुरक्षा तंत्र के भीतर मौजूद कुछ लोगों के समर्थन या उन्हें ‘बर्दाश्त’ करने की वजह से बचे हुए हैं.
तालिबान ने Pakistan पर आरोप लगाया है कि वह अपनी जमीन से आई को फलने-फूलने की इजाजत दे रहा है. आई नेता सनाउल्लाह गफारी की Pakistan के अंदर कथित आतंकी कैंपों में आने जाने का हवाला दिया है. ऑनलाइन मैगजीन ‘अमेरिकन थिंकर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून में तालिबान ने दावा किया कि उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में उन जगहों पर हमले किए जो उनके आई से जुड़े थे.
रिपोर्ट में बताया गया है, “Pakistan की लंबे समय से चली आ रही यह रणनीति कि अफगानिस्तान को उसके अपने सुरक्षा सिस्टम का ही एक हिस्सा माना जाए, अब फेल हो चुकी है. दशकों तक, Pakistanी सेना और खुफिया एजेंसी के नेताओं ने ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ (रणनीतिक गहराई) की नीति अपनाई. उनका मानना था कि काबुल में अपनी सोच के अनुकूल Government होने से India के खिलाफ Pakistan को अतिरिक्त जगह मिलेगी और पश्चिमी सीमा पर दुश्मनी का खतरा नहीं रहेगा. अब यह सोच गलत साबित हो चुकी है.”
रिपोर्ट में कहा गया, “जब अगस्त 2021 में तालिबान सत्ता में लौटा, तो Pakistanी नेताओं को उम्मीद थी कि वे उनकी बात मानेंगे. वे चाहते थे कि तालिबान डूरंड लाइन को स्वीकार करे, तहरीक-ए-तालिबान Pakistan (टीटीपी) को दबाए और Pakistanी व्यापार मार्गों और उनकी मदद पर निर्भर रहे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इसके बजाय, तालिबान ने अपनी आजादी को महत्व दिया. इस्लामाबाद और काबुल के बीच रिश्ते बिगड़ गए हैं और अब सीमा पर झड़पें, हवाई हमले, आर्थिक दबाव और आतंकवाद को समर्थन देने के आपसी आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं.”
रिपोर्ट के अनुसार, Pakistanी अधिकारी अब टकराव वाला रुख अपना रहे हैं. Pakistan के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने फरवरी 2026 में कहा था कि “हमारे सब्र का बांध टूट चुका है” और खुली जंग शुरू हो गई है.
इसमें बताया गया है कि आई तालिबान का सबसे खतरनाक जिहादी दुश्मन बना हुआ है. जहां तालिबान का एजेंडा मुख्य रूप से अफगानिस्तान पर केंद्रित है, वहीं आई इस्लामिक स्टेट की अंतरराष्ट्रीय विचारधारा को मानता है और तालिबान को गैर-कानूनी मानता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 से तालिबान इस समूह के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहा है. इसलिए, अगर Pakistan आई के प्रति कोई भी नरमी दिखाता है, तो इससे तालिबान की आतंकवाद-विरोधी कोशिशें कमजोर हो सकती हैं और एक सक्षम क्षेत्रीय आतंकवादी नेटवर्क का खतरा बढ़ सकता है.
‘अमेरिकन थिंकर’ ने बताया, “इस मुकाबले में वाखान कॉरिडोर एक मुख्य केंद्र बन गया है. जमीन की यह संकरी पट्टी अफगानिस्तान को चीन के शिनजियांग इलाके से सीधे जोड़ती है. चीन की ओर काबुल एक सड़क बना रहा है. मई 2026 में, अफगान अधिकारियों ने बताया कि रास्ते का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है.”
रिपोर्ट में कहा गया है, “अगर यह कॉरिडोर चालू हो जाता है, तो अफगानिस्तान Pakistanी इलाके पर निर्भर हुए बिना चीन के साथ व्यापार और सामान की आवाजाही कर सकेगा. इससे जमीन से घिरे अफगानिस्तान पर Pakistan का पुराना दबदबा कम होगा और अफगानी सामान के लिए ‘चीन-Pakistan इकोनॉमिक कॉरिडोर’ का महत्व भी शायद कम हो जाएगा.”
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान के बदख्शान प्रांत और वाखान कॉरिडोर के आस-पास अस्थिरता से Pakistan को लाभ हो सकता है. इससे बीजिंग को सीधी कनेक्टिविटी में देरी करने का बहाना मिल सकता है और चीन के मुख्य पश्चिमी सहयोगी के तौर पर Pakistan की स्थिति बनी रह सकती है.
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केआर/
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