
प्रिटोरिया, 4 नवंबर . अफगानिस्तान ने Pakistan पर सीमा पार घुसपैठ करने वाले समूहों को समर्थन और प्रशिक्षण देने का आरोप लगाया है. इससे पहले भारत, ईरान और कई पश्चिमी देशों ने भी Pakistan स्थित तत्वों पर आतंकवादी समूहों को समर्थन देने और क्षेत्र में हिंसा तथा अस्थिरता फैलाने के आरोप लगाए हैं. यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है.
दक्षिण अफ्रीका स्थित मीडिया संस्थान ‘इंडिपेंडेंट ऑनलाइन’ (आईओएल) की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान का दावा है कि अफगान बलों ने नूरिस्तान प्रांत में 41 लड़ाकों को मार गिराया और 62 अन्य को गिरफ्तार किया. तालिबान के अनुसार, ये सभी कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े समूहों से संबंधित थे और उन्हें Pakistan का समर्थन प्राप्त था.
‘अफगानिस्तान इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के अनुसार, 29 सितंबर को जारी एक बयान में तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि नूरिस्तान के कामदेश जिले में सशस्त्र विरोधियों के खिलाफ उसका अभियान पूरा हो गया है. इस अभियान में 41 लोगों के मारे जाने और 62 लोगों की गिरफ्तारी की बात कही गई. अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान का दावा है कि ये लड़ाके Pakistan की सीमा पार से आए थे और उन्हें वहां की सैन्य व्यवस्था का समर्थन प्राप्त था.
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि घुसपैठ की यह कथित कोशिश Pakistanी सेना के ‘सीधे मार्गदर्शन और सहयोग’ में की गई थी. तालिबान ने आरोप लगाया कि Pakistan अपने यहां लड़ाकों की भर्ती और उन्हें हथियार उपलब्ध कराकर अफगानिस्तान में अस्थिरता बढ़ा रहा है.
रिपोर्ट में याद दिलाया गया है कि पहले भी Pakistan पर हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे समूहों को पनाह देने और उन्हें सक्रिय रहने की अनुमति देने के आरोप लगते रहे हैं. ये आरोप खास तौर पर उस समय लगाए गए थे जब अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना तैनात थी.
अमेरिकी संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ के तत्कालीन अध्यक्ष एडमिरल माइक मुलन ने एक बार कहा था, “हक्कानी नेटवर्क, Pakistan की खुफिया एजेंसी का एक वास्तविक हिस्सा जैसा काम करता है.”
India भी लंबे समय से Pakistan पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने, जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने और देश में हमलों को अंजाम देने वाले आतंकियों का समर्थन करने के आरोप लगाता रहा है. India ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ऐसे सबूत पेश करने का भी दावा किया है जो Pakistanी सरकारी तत्वों की कथित भूमिका की ओर इशारा करते हैं.
इसी तरह, ईरान ने भी Pakistan की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) पर आतंकियों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं. ईरान का कहना है कि उसके पास ऐसे सबूत हैं जो आईएसआई की कथित भूमिका को दिखाते हैं. ईरान ने Pakistan से अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने यह चेतावनी भी दी थी कि अगर Pakistan ने जैश अल-अदल नामक संगठन के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वह खुद कदम उठा सकता है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर मोहम्मद अली जाफरी के हवाले से कहा गया है कि Pakistan Government जानती है कि ये समूह कहां सक्रिय हैं और उन्हें Pakistan की सुरक्षा एजेंसियों का समर्थन मिल रहा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोपीय देशों के अधिकारियों ने भी समय-समय पर Pakistan को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनने को लेकर चिंता जताई है.
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि विडंबना यह है कि Pakistan अब उन आरोपों का सामना कर रहा है, जिनका आरोप वह पहले अफगानिस्तान पर लगाता था. रिपोर्ट के मुताबिक, आलोचकों का मानना है कि Pakistan ने वर्षों तक चरमपंथी समूहों को पड़ोसी देशों के खिलाफ रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल किया, लेकिन समय के साथ यही नेटवर्क उसके लिए भी चुनौती बन गया.
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एवाई/डीकेपी
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