
मुजफ्फरपुर, 25 सितंबर . विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता, बिहार में कानून-व्यवस्था और राज्य Government की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं और यह कोई नया आरोप नहीं है.
प्रशांत किशोर ने अपने पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद भी उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया था. उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद जब उनसे प्रतिक्रिया मांगी गई थी, तब उन्होंने कहा था कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करता तो भाजपा को 77 सीटें नहीं मिलतीं और उसकी सीटों की संख्या 50 से भी कम होती.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और एसआईआर से जुड़े विवाद को समझने के लिए मामले की जड़ तक जाना जरूरी है. प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता जब अपराधियों, भ्रष्ट लोगों और माफिया को वोट देती है तो उससे बेहतर शासन की उम्मीद नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि यदि समाज गलत लोगों को सत्ता में पहुंचाएगा, तो Government से साफ-सुथरी व्यवस्था की अपेक्षा करना मुश्किल होगा. अगर आप बबूल बोएंगे, तो आम खाने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?
प्रशांत किशोर ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य Government पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
उन्होंने Gujarat में भारी बारिश के दौरान केंद्र और राज्य Government की सक्रियता का जिक्र करते हुए कहा कि वहां प्राकृतिक आपदा होने पर पूरे देश का ध्यान जाता है, जबकि बिहार में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. किशोर का आरोप है कि Prime Minister Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार की बाढ़ को लेकर अब तक कोई बयान नहीं दिया है.
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी प्रशांत किशोर ने बिहार Government को घेरा. उन्होंने कहा कि राज्य में अपराध और अपराधियों के बढ़ते हौसले को देखकर ऐसा लगता है कि जिन लोगों ने ‘जंगल राज’ के नाम पर वोट मांगकर सत्ता हासिल की थी, वे उससे भी खराब व्यवस्था चला रहे हैं.
उन्होंने बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि “अगर तुमने रील नहीं बनाई होती, तो तुम पकड़े नहीं जाते.” प्रशांत किशोर ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इससे सत्ता में बैठे लोगों की सोच पर सवाल उठता है. उन्होंने कहा कि यदि शासन में बैठे लोगों का रवैया अपराध के प्रति संवेदनशील नहीं होगा तो अपराध-मुक्त समाज की कल्पना करना मुश्किल है.
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में चुनाव, शासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों पर जनता को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
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