अनंत चतुर्दशी : समुद्र मंथन से जुड़ी है कथा, बांधा जाता है 14 गांठों वाला सूत्र    

New Delhi, 25 सितंबर . हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व खास माना जाता है. अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (Friday) को मनाई जा रही है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है. गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है. अनंत चतुर्दशी व्रत को करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर अनंत भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है. अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिये, इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है, जब पाण्डव धृत क्रीड़ा में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी. धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनंत सूत्र धारण किया. अनंत चतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पांडव सब संकटों से मुक्त हो गए थे.

अनंत चतुर्दशी पर पुरुष दाहिने बांह में जबकि महिलाएं बाईं बांह पर अनंत बांधती हैं. 14 गांठों वाला यह सूत्र रक्षा कवच की तरह काम करता है और संकटों से रक्षा करता है. इन 14 नामों का संबंध 14 लोकों से भी माना गया है. भगवान विष्णु के बताए गए 14 नाम हैं. अनंत, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुंठ, श्रीधर, मधुसूदन, वामन, त्रिविक्रम, केशव, नारायण, दामोदर, गोविंद और ऋषिकेश.

ये व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर सुख, शांति, धन और समृद्धि की कामना करते हैं. अनंत चतुर्दशी से जुड़ी कई परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं, जिनमें पंचामृत में अनंत भगवान को खोजने की परंपरा भी शामिल है.

यह व्रत समुद्र मंथन की धार्मिक मान्यता से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. अनंत चतुर्दशी की पूजा में अनंत भगवान को खीरे में बांधकर दूध, दही, घी, मधु और शक्कर से बने पंचामृत में रखकर उन्हें खोजने की परंपरा निभाई जाती है. इस दौरान श्रद्धालु अनंत भगवान को खोजने की रस्म करते हैं. इस परंपरा को समुद्र मंथन से जोड़कर देखा जाता है.

मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था. इससे अमृत और विष के कलश निकले. अमृत का संबंध भगवान विष्णु और विष का संबंध भगवान महादेव से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि भगवान विष्णु के हाथों में अमृत का कलश आया, जबकि विष का पान महादेव ने किया. इसके बाद संसार में खुशहाली की शुरुआत मानी गई.

इसी परंपरा से अनंत चतुर्दशी के व्रत को भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अनंत रूप में प्रकट हुए और भक्तों की रक्षा की. इसी कारण सदियों से इस दिन अनंत चतुर्दशी का व्रत और पूजा करने की परंपरा चली आ रही है.

अनंत चतुर्दशी पर गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव समापन भी होता है. घरों और पंडालों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है.

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एएस/