अजीत डोभाल का चीन दौरा बेहद अहम, भारत स्थिर संबंधों को लेकर उत्सुक: विशेषज्ञ वाइल अव्वाद

New Delhi, 23 अगस्त . राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के Monday को होने वाले चीन दौरे को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा कि यह दौरा दो वजहों से महत्वपूर्ण है. पहला सीमा विवाद सुलझाना और दूसरा शी जिनपिंग को ब्रिक्स समिट के लिए आमंत्रित करना. उन्होंने कहा कि India के हालिया कदम चीन के साथ स्थिर संबंध बनाए रखने की उत्सुकता को दर्शाते हैं, जो एशिया के दो बड़े देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए अहम हैं.

अजीत डोभाल के चीन दौरे को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, “यह दौरा दो वजहों से बहुत अहम है. एक तो आपसी मसलों को सुलझाना, खासकर सीमा से जुड़े मसलों को और दूसरा शी जिनपिंग को ब्रिक्स समिट में आने के लिए बुलाना, क्योंकि अभी तक हमें नहीं पता कि वह आएंगे या नहीं.”

उन्होंने आगे कहा कि India ने जो कदम उठाए हैं, वे इस बात का साफ इशारा हैं कि India चीन के साथ स्टेबल रिश्ते बनाए रखने के लिए बहुत उत्सुक है. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच 100 प्रतिशत सहमति नहीं हो सकती है और मतभेद बने रहेंगे. मेरा मानना ​​है कि ये कदम एशिया के दो बड़े देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए अहम कदम हैं.

भारत-अमेरिका संबंध पर वाइल अव्वाद ने कहा, “आप देखिए, President ट्रंप के हालात सुधारने की कोशिश के बाद भारत-अमेरिका के संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने पहले ही दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचाया है.”

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राजदूत को इस संबंध को सुधारने की कोशिश करते हुए और इस बात पर जोर देते हुए देखा है कि भारत, अमेरिका का एक एसेट और एक जरूरी साझेदार है.

वहीं, President डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिकी President द्वारा पड़ोसी देशों और यहां तक ​​कि सहयोगी देशों पर भी टैरिफ लगाने से मुझे लगता है कि यह India Government के लिए चिंता की बात है कि वह टैरिफ के मामलों में India पर दबाव डालने की अपनी नीति जारी रख सकते हैं, जिसका India को सामना करना पड़ेगा.

उन्होंने आगे कहा, “इसे खत्म होना ही है, क्योंकि अमेरिका के President कनाडा जैसे दोस्तों, साझेदारों और पारंपरिक साथियों को भी धमका रहे हैं. इससे पता चलता है कि साथियों के खिलाफ आर्थिक दबाव डालने से कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलता. इसके बजाय इससे देशों के बीच भरोसा कम होता है. ट्रंप पहले ही कनाडा के साथ भरोसे की ऐसी कमी पैदा कर चुके हैं, और कनाडा अब अमेरिका के साथ वैसा ही बर्ताव करके उसी तरह जवाब दे रहा है.”

अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट की तस्वीरें अमेरिकी इलाके के तौर पर शेयर करने के मुद्दे पर विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, “मुझे लगता है कि वह दुनिया को रहने के लिए और खतरनाक जगह बना रहे हैं. जिसे मैं ‘काउबॉय डिप्लोमेसी’ कहूंगा, ट्रंप वो कर रहे हैं. इंटरनेशनल समुद्री रास्तों को बचाने की कोशिश करने के बजाय, वह अब दावा कर रहे हैं कि ये समुद्री इलाके अमेरिकी इलाके हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि वह उन जगहों पर नियंत्रण करना चाहते हैं, जहां तेल और गैस के रिसोर्स और जरूरी व्यापार मार्ग हैं. मेरा मानना ​​है कि वह हालात को और मुश्किल बना रहे हैं. इससे यह बात भी सही साबित होती है कि ईरान के खिलाफ उनकी मौजूदा लड़ाई असल में कभी न्यूक्लियर मुद्दे पर नहीं थी. इसे इजरायल ने आगे बढ़ाया था और Prime Minister बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें इस लड़ाई में धकेला था.

डीकेपी