अगा सैयद रुहुल्लाह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच जुबानी जंग, पार्टी पर किया तीखा पलटवार

श्रीनगर, 3 नवंबर . जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और सांसद अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के बीच जारी जुबानी जंग तेज हो गई है. अब अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के कार्यालय ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है. कार्यालय ने पार्टी पर अपने चुनावी वादों से पीछे हटने और अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के कार्यालय ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी को उस व्यक्ति पर ज्यादा गुस्सा है, जो उसे उसके वादों की याद दिला रहा है, जबकि जम्मू-कश्मीर के अधिकार छीनने वालों के प्रति उसका गुस्सा नजर नहीं आता. कार्यालय ने कहा कि पार्टी का साहस तभी सामने आता है, जब सवाल उससे पूछे जाते हैं.

बयान में कुरान का जिक्र करते हुए कहा गया कि इसकी चर्चा सबसे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने की थी और अगा सैयद रुहुल्लाह ने उसी का जवाब दिया. कार्यालय ने आरोप लगाया कि अब पार्टी उनके जवाब से नाराज है, क्योंकि उसने नेतृत्व को असहज कर दिया है.

कार्यालय ने कहा कि अगा सैयद रुहुल्लाह ने अपनी सीट छोड़ दी, जबकि पार्टी के नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गए. वर्ष 2010 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि रुहुल्लाह उस समय की Government का हिस्सा थे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है. लेकिन तत्कालीन Chief Minister रहे नेता की ओर से ऐसी स्वीकारोक्ति कहां है?

अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर कार्यालय ने सवाल उठाया कि क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने संसद में अगा सैयद रुहुल्लाह के भाषण सुने हैं या उनका अध्ययन केवल उन्हीं बातों तक सीमित है, जो पार्टी के नेतृत्व को अच्छा महसूस कराती हैं.

बयान में पार्टी से पूछा गया कि जब उसने चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लोगों से वोट मांगे थे, तो जीत के बाद यह कहना क्यों शुरू कर दिया कि इसे हटाने वाले ही अब इसे वापस नहीं लाएंगे? कार्यालय ने कहा कि भाजपा उस समय केंद्र की सत्ता में थी और नेशनल कॉन्फ्रेंस को पहले से पता था कि उसे किससे बातचीत करनी होगी. ऐसे में चुनाव के बाद उसका रुख क्यों बदल गया?

आरक्षण के मुद्दे पर भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को घेरते हुए कार्यालय ने कहा कि अगा सैयद रुहुल्लाह दिसंबर 2024 में Chief Minister आवास के बाहर छात्रों के साथ विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. पार्टी इस बात से अच्छी तरह परिचित है और तभी से उन पर निशाना साध रही है.

बयान में कहा गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने का वादा किया था, लेकिन अब केवल एक समिति और लंबित फाइल का हवाला दिया जा रहा है. पार्टी को निर्णय, उसकी तारीखों और प्रस्ताव से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि छात्रों को पता चल सके कि क्या प्रस्तावित किया गया, कब भेजा गया और अब तक क्या लंबित है.

कार्यालय ने पार्टी की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली जाकर नेताओं को शॉल भेंट करना और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की बहाली के जनादेश के साथ सत्ता तक पहुंचना किस तरह की Political कुशलता है? उसने कहा कि चुनावी वादे असुविधाजनक होने पर पार्टी को अगा सैयद रुहुल्लाह की भाषा पर आपत्ति जताने के बजाय अपने वादों का जवाब देना चाहिए.

बयान में आगे कहा गया कि अगा सैयद रुहुल्लाह का Political अस्तित्व किसी नेता की देन नहीं है. वोट और सीटें जनता की हैं. कार्यालय ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व सार्वजनिक पद को अपनी विरासत समझता है और सवाल उठाने वालों को एहसान फरामोश मानता है.

बयान के अंत में कार्यालय ने कहा कि अगा सैयद रुहुल्लाह ने वही सीट लौटा दी, जिसे पार्टी बार-बार उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रही थी. साथ ही ब्रिटेन और लंदन का जिक्र करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर तंज कसा और कहा कि उनके ब्रिटिश समर्थक को अपना पासपोर्ट तैयार रखना चाहिए, क्योंकि उसे लंदन वापस भेजने के लिए प्रथम श्रेणी के टिकट का खर्च वे उठाएंगे.

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डीएससी