
Mumbai , 30 अगस्त . एक्टर मनोज बाजपेयी ने कॉमेडियन समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में प्रवासियों पर किए गए मजाक से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि अगर मजाक में हो रहा है तो दिक्कत नहीं. हमें खुद पर और एक-दूसरे पर हंसना सीखना चाहिए, सम्मान के साथ. उन्होंने दिल्ली में बस ड्राइवर के ‘ए बिहारी’ कहने का अपना किस्सा भी सुनाया.
दरअसल एक्टर मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपनी आने वाली फिल्म ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ के प्रमोशन के दौरान से बात की. जब उन्हें कॉमेडियन के शो में हुई उस घटना के बारे में बताया गया, तो उन्होंने कहा कि अगर यह सब मजाक में हो रहा है, तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है. इस शो में शेरोन वर्मा और समय रैना ने मजाक-मजाक में एक-दूसरे की पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाया था.
मनोज ने कहा, “हमें खुद पर और साथ में भी हंसना सीखना चाहिए. किसी को भावनाओं को आहत किए बिना एक-दूसरे पर हंसना चाहिए और फिर बुरा नहीं मानना चाहिए. हमें यही सीखना चाहिए. हमारे अंदर खुद को लेकर ह्यूमर होना चाहिए, लेकिन साथ ही सम्मान भी होना चाहिए – न सिर्फ अपने लिए, बल्कि उस व्यक्ति के लिए भी जिसके साथ आप बैठे हैं और वह व्यक्ति कहां से आया है, इसके लिए भी. यह बहुत जरूरी है. अगर दो लोग एक-दूसरे के साथ सहज होते हैं, तो वे हमेशा एक-दूसरे पर हंसते हैं.”
इसके बाद एक्टर ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने शुरुआती दिनों की एक घटना का जिक्र किया, जब एक बस ड्राइवर ने उनसे सख्ती से बात की थी.
उन्होंने आगे कहा, “जब मैं दिल्ली में था, तब मैं 18 साल का था, और मैं बस में सामने वाले दरवाजे से चढ़ने की कोशिश कर रहा था क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव था. इसलिए, मुझे शहर के नियमों का पता नहीं था. ड्राइवर ने मेरी तरफ देखा और चिल्लाया, ‘ए बिहारी, पिछले गेट से चढ़ो’. उसे पता नहीं था कि मैं बिहार से हूं, लेकिन असल में मैं बिहार से ही हूं. उसके लिए, जो भी व्यक्ति ऐसी बेवकूफी भरी गलती करता था, वह बिहार से ही होता था. मुझे बुरा नहीं लगा क्योंकि पहली बात, वह सही था कि मैं बिहार से हूं. दूसरी बात, मैं भी गलत नहीं था क्योंकि मैं शहर में नया था और बिल्कुल अनजान था.”
उन्होंने आगे कहा, “जब मैंने अलग-अलग राज्यों के लोगों से दोस्ती की, तो हम एक-दूसरे पर हंसा करते थे. हमें कभी बुरा नहीं लगा या हम कभी आहत नहीं हुए. लेकिन हां, समस्या तब होती है जब कोई बाहर से आकर आपके लिए या समुदाय के लिए परेशानी का कारण बन जाता है. तब दिक्कत होती है. उससे पहले तो हमें एक-दूसरे पर और खुद पर भी हंसने में सक्षम होना चाहिए. यह एक बहुत ही स्वस्थ समाज की निशानी है.”
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पीआईएम/एएस
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