अखिलेश यादव का तंज- ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ नहीं, भाजपा की मंशा ‘वन करप्शन, वन इलेक्शन’ है

Lucknow, 16 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) को लेकर Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा. उन्होंने भाजपा के ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के विचार पर तंज कसते हुए कहा कि उसकी मंशा ‘वन करप्शन, वन इलेक्शन’ जैसी है. उन्होंने दावा किया कि भाजपा का पारंपरिक मतदाता वर्ग उससे दूर हो रहा है. उनके मुताबिक, महंगाई और भ्रष्टाचार से मध्यम वर्ग परेशान है, जबकि युवाओं और महिलाओं में भी Government के प्रति नाराजगी है.

अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एसएसआर का उल्टा आरएसएस होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिलकर मतदाता सूची में गड़बड़ी की साजिश कर रही है, क्योंकि उसे सीधे मुकाबले में अपनी हार का अंदेशा है. उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की पूरी प्रक्रिया एक ही पुनरीक्षण के दौरान पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए.

Lucknow स्थित सपा कार्यालय में Friday को मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि एसएसआर कराया जा रहा है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का क्या औचित्य रह जाता है? उन्होंने चुनाव आयोग से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि एक बार पुनरीक्षण पूरा होने के बाद दोबारा ऐसी प्रक्रिया न चलाई जाए.

अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से सवाल पूछे जाने पर भाजपा जवाब देने लगती है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने प्रदेश की 100 विधानसभा सीटों से संबंधित आंकड़े जुटाकर चुनाव आयोग को सौंपे हैं. इन आंकड़ों में एक ही युवक के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर मतदाता पहचान दर्ज होने का मामला सामने आने का दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि संबंधित युवक पहली बार मतदान करने वाला है और पढ़ाई कर रहा है. वह एक ही जगह वोट डाल सकता है, लेकिन उसके नाम की कई जगह प्रविष्टियां होने से दूसरे लोगों द्वारा उन स्थानों पर मतदान किए जाने की आशंका पैदा होती है.

उन्होंने इसे मामूली चूक मानने के बजाय गंभीर मामला बताते हुए चुनाव आयोग से जवाब मांगा. मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर अखिलेश ने कहा कि यह छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि ‘खोटी गलती’ है. उन्होंने एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मौतों का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि उस प्रक्रिया में 20 बीएलओ की जान गई थी. उन्होंने सवाल किया कि जब मतदाता सूची से जुड़े मामलों में गंभीर शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जाती?

सपा अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी कटाक्ष करते हुए पुराने संदर्भों का जिक्र किया और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया के पीछे भाजपा का Political मकसद है और मतदाता सूची से जुड़ी हर शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने चंदा चोरी और धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सनातनी मतदाता भी भाजपा से नाराज हैं. उन्होंने नीट जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है.

अखिलेश ने दावा किया कि जेन-जी, जेन-अल्फा और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बीच भी भाजपा को लेकर असंतोष बढ़ रहा है. इस दौरान अखिलेश यादव ने पूर्व सांसद राजपाल सैनी समेत पार्टी में शामिल हुए नेताओं का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि आपसी प्रेम, दया और अपनापन बढ़ाने से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार मजबूत होगा. उन्होंने दावा किया कि कश्यप, दलित और अन्य सामाजिक वर्गों के लोग बड़ी संख्या में Samajwadi Party से जुड़ रहे हैं, जिससे पार्टी का जनाधार बढ़ेगा.

अखिलेश ने संकेत दिया कि आने वाले समय में दूसरे दलों के नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने कहा, “अभी तो ये शुरुआत है. अभी विधायकों का स्वागत नहीं हुआ है. वो भी बड़ी संख्या में हैं. ऐसे भी कई दल हैं, जो मोलभाव कर रहे हैं. जब वो हिसाब-किताब लगा लेंगे, तो हम उनकी तरफ भी देखेंगे.”

सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भी दावा किया कि प्रदेश के कई प्रभावशाली लोग अखिलेश यादव के नेतृत्व में पार्टी से जुड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में किसान, गरीब और नौजवान समेत प्रदेश की जनता Samajwadi Party की Government बनाने का काम करेगी.

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विकेटी/डीकेपी