अंतरिक्ष समझौते से तेल-यूरेनियम तक भारत-कनाडा के बीच व्यापार की अपार संभावनाएं: क्रिस्टोफर

नई द‍िल्‍ली, 13 अक्टूबर . India में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने के साथ व‍िशेष बातचीत में बताया क‍ि इस महीने India और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है और मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी. कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां पहले से ही India में सक्रिय हैं और India ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है. दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं.

से बात करते हुए उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कहा क‍ि India और कनाडा के बीच अभी उतना व्यापार नहीं है, जितनी क्षमता दोनों देशों में मौजूद है. निवेश का स्तर ठीक-ठाक है, लेकिन कृषि, रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे कई क्षेत्रों में व्यापार अभी भी सीमित है. तेल का उदाहरण लें. कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन India को उसका पहला तेल निर्यात 2024 में हुआ, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ डॉलर थी. जबकि India हर साल लगभग 150 अरब डॉलर का तेल आयात करता है. इससे साफ है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की कितनी बड़ी संभावना मौजूद है. यह केवल एक उदाहरण है. कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम अभी उस आर्थिक साझेदारी की शुरुआती अवस्था में हैं, जो भविष्य में कहीं ज्यादा बड़ी हो सकती है.

कनाडा की एयरोस्पेस कंपनियां Bengaluru के आसपास पहले से ही हैं. दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता भी मौजूद है. दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच लगभग 30 साल पुराना सहयोग समझौता भी मौजूद है.

अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम ने नए अवसर पैदा किए हैं. India ने निजी रॉकेट लॉन्च के क्षेत्र में अच्छी प्रगति की है. स्काईरूट जैसी कंपनियां इसका उदाहरण हैं, जिनका मैंने कुछ हफ्ते पहले दौरा भी किया था. कनाडा में भी इसी तरह का स्टार्टअप माहौल तेजी से विकसित हो रहा है. इस महीने दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों की बैठक होने वाली है और मुझे उम्मीद है कि इससे आगे और प्रगति होगी.

क्रिस्टोफर कहा, इसी तरह India की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल सभी 32 खनिज कनाडा के पास उपलब्ध हैं. कनाडा अपने खनन क्षेत्र को तेजी से विकसित कर रहा है और इसके लिए रेलवे सहित बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश किए जा रहे हैं. अभी India इन खनिजों में से कई की बहुत कम मात्रा कनाडा से आयात करता है. पोटाश का कुछ व्यापार होता है, जबकि तांबा और निकेल का व्यापार बेहद सीमित है. दूसरी ओर, कनाडा के पास लिथियम और ग्रेफाइट जैसे संसाधन हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों के लिए बेहद जरूरी हैं.

उन्‍होंने कहा क‍ि दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं. उदाहरण के लिए टंगस्टन, जिसका इस्तेमाल रक्षा और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है. कनाडा के पास टंगस्टन के बड़े भंडार हैं और हम India के खान मंत्रालय तथा निजी कंपनियों के साथ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आपूर्ति, प्रोसेसिंग और बाजार विकास में कैसे सहयोग किया जा सकता है.

क्रिस्टोफर ने बताया क‍ि इसके अलावा ऊर्जा एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है. कनाडा दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. इसके अलावा वह तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भी बड़ा उत्पादक है. कनाडा के पास यूरेनियम के भी पर्याप्त भंडार हैं. मार्च में कनाडा ने India के साथ लगभग 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति समझौता किया था. India के 24 परमाणु रिएक्टरों में से 18 कनाडाई डिजाइन पर आधारित हैं, जो भविष्य में और सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं.

उन्‍होंने बतायाक क‍ि हम कनाडा के पश्चिमी तट पर ऐसे बुनियादी ढांचे का भी विकास कर रहे हैं, जिससे India को ऊर्जा निर्यात करना और आसान हो जाएगा. अगले तीन महीने, छह महीने, एक साल और उसके बाद भी ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ने की उम्मीद है. India के पास कनाडा से ऊर्जा हासिल करने के ऐसे नए विकल्प होंगे, जो पहले उपलब्ध नहीं थे.

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एवाई/पीएम