सोशल मीडिया के भरोसे से राजनीतिक दल : मतदाता का दिमाग भी तक भ्रमित

उदयपुर, 14 अप्रैल (उदयपुर किरण). लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की तिथि भले ही धीरे धीरे नजदीक आती जा रही है, मगर प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा व कांग्रेस का चुनाव का प्रचार जमीन नही उतर पाया और यह दल केवल सोशल मीडिया के भरोसे चुनावी बैतरणी से पार होना चाहते हैं तो मतदाता को अभी तक चुनावी खेल कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए उनका प्रतिनिधि उनके पास आकर क्या वादे करेगा, ऐसे में मतदाता का दिमाग भी तक भ्रमित हो रहा है. सोशल मीडिया पर चल रही हवा-बाजी के बयानों से मतदाताओं का ओर अधिक दिमाग खराब है.

मजेवाली बात तो यह है कि सोशल मीडिया पर कांग्रेस व भाजपा दोनो ही राजनीतिक दलों द्वारा कई तरह के गलत बयानों, प्रचार के साधन सामग्री डालकर चुनावी हवा बनाई जा रही है, मगर सोशल मीडिया पर चल रही इन गलत बयानबाजी, हवाई चुनाव प्रचार को रोकने के लिए निर्वाचन विभाग की टीम तनिक भी सक्रिय नही दिख रही है. ऐसे में आखिर इन कैसे लगाम कही जाएं और जनता के बीच उनका प्रत्याशी आएं और उनके सुख दुख पहुंचे, यह चर्चाएं आजकल चाय-पान की चौपालों की खूब होती नजर आ रही है. शहर के मतदाताओं का कहना है कि एक समय था तब लोकसभा चुनाव के नामांकन प्रक्रिया से पूर्व चुनावी प्रचार जनता के बीच पहुंच जाता था और मतदाता प्रत्याशी के चेहरे से रुबरु होकर उनके क्षेत्र के विकास कार्यो के बारे में अवगत कराकर क्षेत्र के विकास की उम्मीद लगाते थे. मगर अब तक प्रत्याशी तो दूर की बात है, पार्टियों नेता व कार्यकर्ता भी उनके पास पहुंच ही नहीं रहे हैं.

केवल सोशल मीडिया पर संदेश देकर अपना काम चल रहे हैं. जिससे आम मतदाताओं को कोई सरोकार ही नही है. लोकसभा चुनाव में हाईटेक चुनाव प्रचार पर लगाम कसने के लिए निर्वाचन आयोग भले ही टीम गठित हो गई, मगर अब तक सोशल मीडिया पर चले कई तरह के गलतबयानी, जुमलेबाजी और प्रचार सामग्री पर आपत्ति लगाने की एक कार्यवाही सामने नही आई है. ऐसे में ऐसा लगता है कि निर्वाचन विभाग भी आंखे मूंद कर चैन की नींद सो रहा है. जिससे इस चुनाव में गलतबयान बाजी, जुमलेबाजी सहित झूठे प्रचार के बीच होती बहस से कभी भी कहीं भी संसदीय क्षेत्र में आबोहवा खराब हो सकती है. मतदाताओं का तो यह भी कहना है कि भाजपा व कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता बंद कमरों में बैठकर चुनावी प्रचार लगे है और आगे जनता के काम कैसे होंगे और उनकी कौन सुनेगा. उन्हें तो लग्जरी कारों, ऐसी भरे कमरो में बैठ कर मोबाईलों पर प्रचार करने से फूर्सत नहीं है.


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