सोलह और सत्रह सीसीए प्रकरणों के निस्तारण में विभाग के स्तर पर देरी नहीं -उर्जा मंत्री

जयपुर, 11 जुलाई (उदयपुर किरण). राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ विधायक सूर्यकान्ता व्यास ने सोलह सीसीए एवं सत्रह सीसीए के तहत प्रस्तावित चार्जशीट के प्रकरणों के निस्तारण के सवाल पर उर्जा मंत्री बुलाकीदास कल्ला को जमकर घेरा. उन्होंने इस संबंध में पूछे गए तारांकित सवाल के जवाब से असंतुष्टि जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार अधिकारियों को बचाना चाहती है. इससे पूर्व मंत्री कल्ला ने विधानसभा में बताया कि कार्मिक विभाग में विभिन्न स्तर के अधिकारियों के विरूद्ध सोलह सीसीए एवं सत्रह सीसीए के तहत लम्बित प्रकरणों का निस्तारण करने की एक सतत् प्रक्रिया है और विभाग के स्तर पर निस्तारण में कोई देरी नहीं की जाती है.

कल्ला ने कार्मिक मंत्री की ओर से पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि वर्तमान में 16 सीसीए एवं 17 सीसीए के 1030 प्रकरण लम्बित है, जिनमें 162 प्रकरण लिखित एवं अभिलिखित स्तर पर, 271 कार्मिक विभाग, 336 जाँच अधिकारी के समक्ष, 6 मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर 40, राजस्थान लोक सेवा आयोग, 33 राज्यपाल कार्यालय में एवं 172 प्रकरण प्रशासनिक विभाग में लम्बित है.

उन्होंने बताया कि कार्मिक विभाग में अधिकारियों की शिकायतों के प्राप्त प्रकरणों में गम्भीर प्रवृत्ति के प्रकरणों को 16 सीसीए में एवं सामान्य मामलों में 17 सीसीए के तहत कार्यवाही की जाती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हम इन प्रकरणों के निस्तारण के प्रति गम्भीर है लेकिन पूववर्ती सरकार ने तो अपने समय में इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने प्रकरणों के निस्तारण में देरी होने के सम्बन्ध में बताया कि विभाग में प्रकरण के प्राप्त होते ही प्रकरण का परीक्षण किया जाता हैं उसके बाद प्रकरण जांच में चले जाता है जिसमें जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है. उन्होंने बताया कि प्रकरण से सम्बन्धित अधिकारी को कई बार सुनवाई का अवसर दिया जाता है. कल्ला ने बताया कि वर्तमान में कार्मिक विभाग को प्राप्त सीसीए-नियम 16 के अन्तर्गत 1030 प्रकरण विभिन्न स्तरों (कार्मिक विभाग, जांच अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्थान लोक सेवा आयोग, राज्यपाल) पर लंबित है.

 

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