सारण से चुनाव लड़ेंगे Lalu Yadav, 2014 में राबड़ी की हार का बनें थे कारण

Lalu Yadav Saran

लालू यादव एक बार फिर से लोकसभा चुनाव के मैदान में हैं. इस बार वे बिहार के सारण लोकसभा सीट से ताल ठोंक रहे हैं. सारण से चुनावी मैदान में उतरने वाले लालू यादव आरजेडी अध्यक्ष नहीं बल्कि उनके हमनाम हैं. जो 2014 में राबड़ी देवी के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं.

2014 में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की हार में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लालू यादव एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं. आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव भले ही जेल में हों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार चुनाव नहीं लड़ सकते हों. लेकिन उनके ही हमनाम (लालू यादव) सारण से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक रहे हैं.

2014 के चुनाव में लालू की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की हार में उनका अहम योगदान था. 2014 में वे राबड़ी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्यशी के तौर पर उतरे थे, और राबड़ी के बराबर वोट हासिल किए थे.

चुनाव हारने के बाद आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव ने भी कहा था कि निर्दलीय प्रत्याशी को उनके हमनाम होने का फायदा मिला. और इसी के चलते उसे राबड़ी के बराबर वोट मिल गए.

लालू ने कहा कि उनके हमनाम होने से जनता भ्रमित हो गई और उसने सिर्फ नाम पर ही वोट डाल दिया. मौजूदा वक्त में लालू यादव चारा घोटाले के मामले में जेल में हैं. और चुनावी प्रक्रिया से दूर हैं. उन्होंने कुछ दिनों पहले जमानत के लिए याचिका भी डाली थी, लेकिन अदालत ने उसे ठुकरा दिया था. जिसके चलते इस बार वे अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए प्रचार भी नहीं कर सकेंगे.

वहीं लालू अभी तक वार्ड से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई है. उनके अनुसार वो हार नहीं मानेंगे और जब तक जीत नहीं जाते चुनाव लड़ते रहेंगे.

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