वी-मार्ट की बिल्डिंग अवैध : नगर परिषद व यूआईटी नियमानुसार कार्यवाही के लिए स्वतंत्र

वी-मार्ट की बिल्डिंग अवैध : नगर परिषद व यूआईटी नियमानुसार कार्यवाही के लिए स्वतंत्र

उदयपुर. शास्त्री सर्कल पर तीन मंजिला भवन में संचालित हो रहे डिपार्टमेंटल स्टोर (वी-मार्ट) के भवन को अवैध मानते हुए अदालत ने भवन के मालिक का अस्थाई निषेधाज्ञा का वाद सुनवाई के बाद अस्वीकार कर दिया. अदालत ने माना कि जिस भूखंड पर यह भवन बना है वह उसके आधिपत्य व स्वामित्व का नहीं है और न ही उसका व्यावसायिक भू परिवर्तन कराया है. नगर परिषद व यूआईटी अब फैसले के बाद नियमानुसार कार्यवाही के लिए स्वतंत्र है.

प्रकरण के अनुसार शहर के सीविल न्यायालय उत्तर में उदयपुर निवासी सरिता मंत्री और उसके पति प्रहलाद पुत्र इंदरलाल मंत्री ने नगर परिषद जरिये आयुक्त, नगर विकास प्रन्यास जरिये सचिव एवं राजस्थान सरकार जरिये जिला कलेक्टर के खिलाफ 22 अक्टूबर 2008 को अस्थाई निषेधाज्ञा का वाद पेश किया, जिसमें वादी ने बताया कि उसके स्वामित्व एवं आधिपत्य का 2986.80 वर्गफीट भूखंड 104 शास्त्री सर्कल न्याय मार्ग पर स्थित है और उस पर गुणवत्तायुक्त भवन का निर्माण करवा रखा है और वर्तमान में उस भवन में डिपार्टमेंटल स्टोर (वी-मार्ट) का संचालन हो रहा है. स्वयं व्यवसाय से जुड़ी इकाईयों डिपार्टमेंट स्टोर से ईष्र्या व द्वेष रखते है इसी कारण भूखंड को अवैध और उस पर कराए गए निर्माण को अतिक्रमण बताने में तत्पर है. नगर परिषद, यूआईटी उक्त भूखंड पर बने भवन पर कार्यवाही करवाने जा रही है. इसलिए प्रतिवादियों को वादी के व्यवसाय में बाधा उत्पन्न न करे और न ही माल फैंके व तोडफ़ोड़ करे न ही किसी अन्य एजेंसी से कराए और न धमकाए इसके लिए अस्थाई निषेधाज्ञा के वाद से रोका जाए.

दोनों पक्षों की बहस की सुनवाई के दौरान नगर परिषद के अधिवक्ता अशोक सिंघवी ने तर्क दिया कि 20 अक्टूबर 2008 को ही भूखंड पर स्थापित व्यक्ति को भूखंड पर बने भवन का व्यावसायिक भू परिवर्तन कराने का नोटिस दिया था, जबकि यूआईटी एवं राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता शरद दशोरा ने तर्क देते हुए कहा कि उक्त जमीन का स्वामित्व वादी के पास नहीं है और वह बिना स्वीकृति के व्यावसायिक कार्य कर रहा है. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अतिरिक्त सीविल न्यायालय शहर उत्तर के पीठासीन अधिकारी रूपेंद्र चौहान ने अपने फैसले में लिखा कि वादी वादग्रस्त सम्पत्ति के स्वामित्व एवं आधिपत्य संबंधी दस्तावेज पेश नहीं कर सका. वह सम्पत्ति उसकी नहीं है न ही उक्त सम्पत्ति का व्यावसायिक भू उपयोग के लिए परिवर्तन भी नहीं कराया और वादी स्वयं ने माना कि वह उस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां कर रहा है. वादी के वाद को खारिज कर दिया. प्रतिवादीगण अब नगर परिषद एवं यूआईटी अवैध रूप से शास्त्री सर्कल पर बनी बिल्डिंग में संचालित डिपार्टमेंट स्टोर (वी-मार्ट) के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही के लिए स्वतंत्र है.


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